बचपन के साथी ‘लक्ष्मी’ और ‘नारायण’ बनेंगे जीवनसाथी

उज्जैन में मकर संक्रांति पर होगा अनोखा विवाह: सनातन अनुसार बांटी जा रही शादी की पत्रिकाएं

विशाल जूनवाल उज्जैन। मकर संक्रांति पर्व पर उज्जैन एक अनोखी शादी का साक्षी बनने जा रहा है। इस शादी में ‘लक्ष्मी’ और ‘नारायण’ नामक बचपन के यह दो साथी अब जीवनसाथी बनेंगे। देवास रोड स्थित पुलिस लाइन के समीप पुलिस सामुदायिक केंद्र में सनातन धर्म के अनुसार विवाह होगा जिसमें हल्दी, मेहंदी, माता पूजन, गणेश पूजन जैसी वह सभी रस्में निभाई जाएंगी जो आमतौर पर विवाह समारोह के दौरान होती हैं। मेहमानों के लिए रिसेप्शन भी होगा जिसमें तरह-तरह के व्यंजन परोसे जाएंगे। इसके लिए दोनों पक्ष तैयारियां कर रहे हैं। इस विवाह समारोह की खास बात यह है कि दुल्हन लक्ष्मी एक गाय हैं और दूल्हा नारायण नंदी है।
इस विवाह का आयोजन बिरला अस्पताल के समीप आनंदनगर में रहने वाले रिटायर्ड एएसआई रामनरेश बैरागी द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पौने तीन साल पहले वह बछिया लक्ष्मी को आनंदगंज की झिरी, इंदौरगेट निवासी प्रकाश यादव के यहां से अपने घर लाए थे और उसे परिवार के सदस्य की तरह पाला। इस बाद दोनों पक्षों की सहमति से अब लक्ष्मी का विवाह प्रकाश यादव के नंदी नारायण से होने जा रहा है जो उसका बचपन का साथी है।
घर में लक्ष्मी का अलग कमरा
रिटायर्ड एएसआई के पुत्र अभिषेक बैरागी ने बताया पौने तीन साल की लक्ष्मी घर में सबकी लाडली है और परिवार के सदस्यों की तरह ही रहती है। उसके लिए अलग से कमरा भी है। विवाह पर ४ से ५ लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। आमंत्रण देने के लिए पत्रिकाएं छपवाई गई हैं और 350 बांटी जा चुकी हैं। साथ ही वॉट्सएप पर भी निमंत्रण भेजे हैं।
किस दिन क्या कार्यक्रम
विवाह की रस्में 12 जनवरी से शुरू हो जाएंगी। पहले हवन होगा। १३ को हल्दी, मेहंदी, मंडप, माता पूजन और गणेश पूजन होगा। १४ को सुबह ९ बजे बारात आएगी और १० बजे से विवाह समारोह की शुरुआत हो जाएगी जो दोपहर २ बजे तक चलेगी।
मेहमान आशीर्वाद लेने आएंगे
सामान्य विवाह समारोह में शामिल होने वाले मेहमान वर-वधू को आशीर्वाद देने आते हैं लेकिन इस शादी की खास बात यह होगी कि इसमें शामिल होने वाले घराती, बाराती एवं अन्य मेहमान लक्ष्मी और नारायण का आशीर्वाद लेंगे। इसके लिए फिलहाल जोर-शोर से तैयारियां की जा रही हैं।
बैंडबाजे के साथ बारात
नंदी नारायण की बारात14 जनवरी को बैंडबाजे के साथ धूमधाम से निकाली जाएगी जो विवाह स्थल पहुंचेगी। यहां वधू यानी लक्ष्मी के पक्ष की ओर से बैरागी परिवार द्वारा बारातियों का स्वागत किया जाएगा। इसके बाद मंत्रोच्चार के बीच शादी की रस्में निभाई जाएंगी। विवाह को वृषभोत्सव नाम दिया है।









