जमीनी पकड़ वाले नेताओं को सौंपी कमान

शहर में मुकेश भाटी और उज्जैन जिले में विधायक महेश परमार को मिली कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। रायशुमारी के करीब दो महीने बाद कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले में जमीनी पकड़ वाले नेताओं को अध्यक्ष की कमान सौंपी है। शनिवार को एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रदेश के 71 जिला और शहर अध्यक्षों के नाम की सूची जारी की। इसमें मौजूदा शहर अध्यक्ष मुकेश भाटी को फिर से अध्यक्ष बनाया गया है। सुरक्षित तराना सीट से दूसरी बार के विधायक महेश परमार को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। कांग्रेस की राजनीति में भाटी-परमार को जय-वीरू की जोड़ी के तौर पर जाना जाता है। इनका जुझारूपन, जनसंपर्क, सहजता इन्हें औरों से अलग करती है।
संगठन को मजबूत बनाने के लिए दो महीने पहले एआईसीसी ने गुजरात और मध्यप्रदेश का चयन किया था। नई कांग्रेस खड़ी करने के लिए एआईसीसी (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी)ने अपने पर्यवेक्षक हर जिले में भेजे थे। इनके सहयोग के लिए पीसीसी (प्रदेश कांग्रेस कमेटी)से भी पर्यवेक्षक आए थे। उज्जैन शहर के लिए कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक और उज्जैन जिले के लिए नदीम जावेद ने रायशुमारी की थी। सात से 10 दिनों तक पर्यवेक्षकों ने पार्टी कार्यकर्ताओं, वरिष्ठ नेताओं, समाज के प्रबुद्धजनों से चर्चा की थी और अपनी रिपोर्ट एआईसीसी को भेजी थी। एआईसीसी ने भी अपने स्तर पर रिपोर्ट का परीक्षण किया था और करीब दो माह बाद जमीनी आधार वाले लोगों को मौका दिया।
एक साल में कांग्रेस को जिंदा करने का प्रतिफल मिला
उज्जैन शहर अध्यक्ष बने मुकेश भाटी के अध्यक्ष बनने में उनका जुझारूपन काम आया। एक साल पहले उन्हें जब शहर अध्यक्ष बनाया गया था तो कांग्रेस गुटों में बंटी हुई थी और इसे ‘कमल कांग्रेस’ के तौर पर जाना जाता था। हाल यह था कि कांग्रेस के कार्यक्रम और आंदोलन में 50 कार्यकर्ता भी नहीं जुटते थे। 13 साल तक ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष और पार्षद रह चुके मुकेश भाटी ने सभी गुटों को एक जाजम पर लाने का काम किया। उन्होंने युवाओं की टीम जोड़ी और वरिष्ठों को भी पूरा सम्मान दिया। नतीजा यह रहा कि शहर में कांग्रेस अपने बूते पर खड़ी होने लगी। कांग्रेस को ‘कमलछाप’ से मुक्ति दिलाने का फल मुकेश भाटी केा अध्यक्ष के रूप में मिला है। अक्षरविश्व से भाटी ने कहा कि वह जल्दी ही अपनी नई कार्यकारिणी का गठन करेंगे।
लडऩे का जुनून बना ताकत इसने दिलाई कुर्सी
तराना सुरक्षित सीट से दूसरी बार विधायक बने महेश परमार को उनके जुझारूपन ने जिलाध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचाया है। माधव कॉलेज में पढ़ते हुए कंठाल चौराहे से संचालित होने वाली स्टूडेंट यूनियन से छात्र राजनीति की शुरुआत करने वाले परमार की खासियत मौका देखकर चौका लगाने की है। राजनीति की पिच पर आने वाली मुद्दों की गेंदों को समझने में उन्हें महारत हासिल है, यहीं कारण है कि वह मुद्दों को लपक लेते हैं। इसी के सहारे उन्होंने जिला पंचायत से होते हुए विधायक तक का सफर तय किया है। 2018 में उन्होंने तराना सुरक्षित सीट से अनिल फिरोजिया को हराया तो 2023 में भी अपनी सीट बरकरार रखी। उज्जैन महापौर चुनाव में उन्होंने भयंकर गुटबाजी के बावजूद सिर्फ 15 दिन में ही चुनाव का माहौल बदल दिया था और कुछ ही वोटों से हार गए थे।









