नृसिंहघाट पर नदी में मलबा डाला अब हटा रहे, पुल की जगह बदली

उज्जैन। सिंहस्थ की तैयारियों के लिहाज से अहम् नृसिंह घाट समानांतर ब्रिज की जगह को एकाएक बदल दिया गया है। यह स्थिति तब है जब पहले से बने ब्रिज के पास जगह खाली कर सैकड़ों डंपर मलबा और मिट्टी नदी में डालकर ब्रिज बनाने का काम शुरू भी कर दिया गया था। अब इस मलबे को हटाने का काम शुरू किया गया है। सिंहस्थ के कामों में यह पहला मौका है जब किसी बड़े काम का भूमिपूजन हुआ हो, काम शुरू भी हो गया हो और उसके बाद उसका स्थान बदला गया हो।

उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर 452 करोड़ रुपए की लागत से 19 ब्रिज बनाए जाएंगे। इनमें से अधिकांश के काम शुरू हो चुके हैं। सेतु निगम के अधिकारियों ने रामघाट के आसपास क्राउड कंट्रोल के नजरिए से नृसिंह घाट पर पहले से तैयार ब्रिज के समानांतर ही शिप्रा नदी पर एक ओर ब्रिज बनाने की प्लानिंग की थी। नए ब्रिज के लिए गुजरात की कंपनी बी.आर. अग्रवाल फर्म को 10.४० करोड़ रुपए में ठेका दिया गया है। इस फर्म ने आते ही पहले आसपास के ढाबों की साइड क्लीयर करवाई और इसके बाद ब्रिज निर्माण के लिए शिप्रा नदी में सैकड़ों डंपर मलबा भी डलवा दिया। साइड पर निर्माण संबंधी अधिकांश सामान भी पहुंचा दिया गया। रविवार को एकाएक इस फर्म के कर्मचारियों ने दोबारा से नदी से मलबा हटवाना शुरू कर दिया।
एप्रोच रोड बना बदलाव की वजह नृसिंह घाट पर पहले से बने ब्रिज के सामानांतर ही दूसरा ब्रिज बनाने की प्लानिंग पर काम शुरू हुआ था। यहां दत्त अखाड़ा साइड में पुल के एप्रोच रोड के लिए पर्याप्त खुली जगह मौजूद है लेकिन रामघाट की ओर एप्रोच रोड के लिए जगह ही नहीं है। माली समाज धर्मशाला और झालरिया मठ के बीच बना मार्ग दो पुलों का क्राउड झेलने के लिहाज से संकरा है। हास्यास्पद बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों को पुल का काम शुरू होने के बाद यह बात समझ आई। अब नए पुल को पहले से प्रस्तावित स्थल से करीब 200 मीटर दूर बनाने और इसके लिए नया एप्रोच रोड तैयार करने की प्लानिंग नए सिरे से की गई है।









