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अभिषेक शर्मा की तस्वीर विवाद पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, जानें मामला

भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा की तस्वीर और पहचान के कथित गलत इस्तेमाल से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी की है। मंगलवार 7 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि आधुनिक डिजिटल युग में डिजिटल दौर में पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकार) और मानहानि के मामलों के बीच की सीमा रेखा बहुत ही महीन हो चुकी है और कई बार ये दोनों विषय एक-दूसरे में पूरी तरह समाए हुए नजर आते हैं।

 

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क्रिकेटर अभिषेक शर्मा ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि ऑनलाइन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, चेहरे और पहचान का गलत उपयोग किया जा रहा है। याचिका में सबसे गंभीर दावा यह किया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए उनकी ओरिजिनल तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की गई है, जिससे आम जनता के बीच भ्रामक और गलत संदेश फैल रहा है।

क्या है एआई से तस्वीर बदलने का पूरा विवाद?

अदालत में सुनवाई के दौरान अभिषेक शर्मा के कानूनी सलाहकार ने स्पष्ट किया कि मूल फोटो में यह युवा क्रिकेटर अपने मैनेजर के साथ मौजूद थे। हालांकि, एआई टूल्स का दुरुपयोग करके मैनेजर का चेहरा और पूरी फोटो का संदर्भ (कॉन्टेक्स्ट) बदल दिया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार, यह सामान्य रूप से कोई फोटो शेयर करने का सीधा मामला नहीं है, बल्कि क्रिकेटर की पहचान और साख का व्यावसायिक व डिजिटल तौर पर अनधिकृत इस्तेमाल है, जो उनकी छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है।

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मानहानि और प्राइवेसी पर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख:

दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की एकल पीठ ने टिप्पणी की कि अदालतें हर दिन ऐसे नए मामले देख रही हैं जहां मानहानि और डिजिटल दौर में पर्सनैलिटी राइट्स का दायरा आपस में टकराता है। न्यायाधीश ने कहा कि यह कानूनी क्षेत्र अभी भारत में शुरुआती दौर में है और तेजी से विकसित हो रहा है। कई बार जो सामग्री पहली नजर में मानहानिकारक लगती है, उसमें किसी मशहूर हस्ती के व्यक्तित्व अधिकारों के हनन का पहलू भी अनिवार्य रूप से जुड़ा होता है।

मेटा (Meta) की कानूनी दलीलें:

सोशल मीडिया दिग्गज ‘मेटा’ की ओर से पेश हुए वकीलों ने अदालत को बताया कि जिन आठ विवादित वेब लिंक्स की बात की जा रही है, उनमें से दो को पहले ही इंटरनेट से हटाया जा चुका है। मेटा का तर्क था कि बाकी बचे लिंक्स में से एक केवल “पापाराजी स्टाइल” (सेलेब्रिटीज की आम तस्वीरें खींचना) की पोस्ट है, जिसे प्रथम दृष्टया किसी के अधिकारों का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता। कंपनी ने यह भी दलील दी कि यदि इंटरनेट पर मौजूद हर नकारात्मक पोस्ट को राइट्स का उल्लंघन मानकर हटाने को कहा जाएगा, तो मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) कंपनियों के लिए पूरे डिजिटल नेटवर्क को संभालना असंभव हो जाएगा।

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एआई और डीपफेक तकनीक की नई चुनौतियां:

अभिषेक शर्मा का यह मामला उन दर्जनों मामलों की कड़ी का हिस्सा है, जहां बॉलीवुड एक्टर्स, खिलाड़ी और नामचीन हस्तियां अपनी आवाज, चेहरे और पहचान के एआई-आधारित दुरुपयोग को रोकने के लिए न्यायपालिका की शरण ले रहे हैं। डीपफेक तकनीक के कारण किसी भी व्यक्ति को झूठे विज्ञापनों या फर्जी वीडियो से जोड़ना आसान हो गया है। ऐसे मामलों में अदालतें अब निजता, अभिव्यक्ति की आजादी और मानहानि के बीच एक सही संतुलन तलाशने का प्रयास कर रही हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस संवेदनशील विषय पर अगली सुनवाई के लिए 9 जुलाई 2026 की तारीख तय की है।

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