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सिंहस्थ की सफलता के लिए 29 किलोमीटर लंबे घाटों का नाम रामघाट हो: हरिगिरी जी महाराज

प्रयागराज कुंभ में दिया था मुख्यमंत्री को घाट बनाने का सुझाव

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महासचिव और जूना अखाड़ा प्रमुख हरि गिरी का कहना है कि सिंहस्थ 2028 की सफलता के लिए शिप्रा के दोनों किनारों पर बनने वाले 29 किलोमीटर के घाटों का नामकरण रामघाट करना चाहिए, ताकि अमृत स्नान को लेकर श्रद्धालुओं में कोई गफलत नहीं हो।
गिरी इन दिनों उज्जैन में हैं। वह नृसिंह घाट के सामने स्थित जूना दातार अखाड़ा परिसर में चल रहे 11 दिवसीय यज्ञ कार्यक्रम में शामिल होने आए हैं। इसी दौरान उन्होंने अक्षर विश्व से चर्चा की।

शिप्रा को गहरा करना जरूरी
हरि गिरी ने शिप्रा की अपवित्रता पर खासी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि शिप्रा को गहरा करना जरूरी है, क्योंकि इसके आसपास ही मानव सभ्यता बसी हुई है। सदियों से उज्जैन में सिंहस्थ हो रहा है और शिप्रा जल से ही अमृत स्नान का महत्व है लेकिन बड़े शहरों की गंदगी शिप्रा को प्रदूषित कर रही है। शिप्रा को शुद्ध करने के लिए नदी के गहरीकरण की जरूरत है और १० से १५ फीट तक खुदाई की जाना चाहिए। अगर ऐसा किया जाता है तो नदी की तलहटी में बंद हो चुकी पानी की धाराएं फिर से जीवित हो जाएंगी और जल बहने लगेगा। यह काम कोई मुश्किल भी नहीं है। मोहन यादव सरकार यह काम कर रही है।

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हरि गिरी ने कहा कि उज्जैन में शिप्रा के दोनों तटों पर घाट बनाने का सुझाव उन्होंने ही सीएम डॉ. मोहन यादव को प्रयागराज कुंभ के दौरान दिया था। इसके पीछे मंशा सिर्फ यह है कि ङ्क्षसहस्थ में आने वाले श्रद्धालु आसानी से स्नान कर सकें। गिरी ने कहा कि सीएम ने इस सुझाव का ना सिर्फ माना, बल्कि उसे जमीन पर भी उतार दिया है। गिरी ने कहा कि वह चाहते हैं कि नए बन रहे घाटों का एक ही नाम रामघाट करना चाहिए, ताकि सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालु भ्रमित नहीं हों और वह कहीं भी स्नान कर लें।

4 को यज्ञ की पूर्णाहुति, 5 को पेशवाई
नृसिंह घाट के सामने स्थित जूना दातार अखाड़े में सिंहस्थ-2028 की सफलता और संभावित कोरोना महामारी के विनाश के लिए हो रहे यज्ञ की पूर्णाहुति 4 जून को होगी। 5 जून को गंगा-दशहरा होगा और पेशवाई के साथ साधु-संतों का स्नान होगा। संतों की पेशवाई नीलगंगा स्थित पड़ाव से सुबह 10.30 निकलेगी और इसमें अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रवींद्रपुरी भी शामिल हो सकते हैं।

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