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फार्मेसी, बायोटेक्नोलॉजी और जूलॉजी में मारामारी

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की अध्ययनशालाओं में एडमिशन का दौर जारी

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उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में एडमिशन की प्रक्रिया जारी है। विवि के फार्मेसी, बायोटेक्नोलॉजी और जूलाजी पाठयक्रम में प्रवेश के लिए मारामारी की स्थिति है। इसकी वजह है इन पाठयक्रमों का रोजगारपरक होन। करियर की अच्छी संभावनाओं को देखते हुए विद्यार्थी उन पाठयक्रमों को तवज्जो दे रहे हैं, जिनमें रोजगार के चांस ज्यादा है। इनमें फार्मेसी टॉप पर हैं। विवि में अलग-अलग पाठयक्रम में विद्यार्थी में प्रवेश के लिए चल रही प्रक्रिया के बीच एडमिशन की स्थिति जानने के लिए अक्षरविश्व रिपोर्टर विवि की अध्ययनशालाओं में पहुंचे।

बीफार्मा की 100 सीट पर 188 से अधिक आवेदन

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सुमित सोलंकी उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के फार्मेसी संस्थान के बी.फार्मा पाठयक्रम की बढ़ती मांग को देखते हुए इस बार सीट बढ़ानी पड़ी है। अब तक 60 सीटों पर प्रवेश दिए जाते थे, लेकिन फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया की स्वीकृति के बाद सत्र 2026-27 से 100 सीटों पर प्रवेश दिया जा रहा है। काउंसिलिंग के पहले चरण में ही अब तक 61 विद्यार्थियों ने प्रवेश ले लिया है और क बची ३९ सीटों के लिए १२७ विद्यार्थी प्रतीक्षा सूची में हैं। विवि में बीफार्मा की शुरुआत 2003- 04 में हुई थी। करीब २२ साल पुराने इसे पाठयक्रम की 100 सीटों के लिए अब तक 188 आवेदन मिल चुके हैं। 30 जून को ऑनलाइन आवेदन लिंक बंद कर दी गई थी। पहली मेरिट सूची जारी होने के बाद चयनित विद्यार्थियों को दस्तावेज सत्यापन और फीस जमा करने के लिए समय दिया गया। वर्तमान में 61 विद्यार्थियों ने दाखिला ले लिया है। दूसरी मेरिट सूची जल्दी ही जारी होने की उम्मीद है।

कैसे मिल रहा प्रवेश: बीफार्मा में प्रवेश प्रक्रिया मध्यप्रदेश शासन के आरक्षण नियमों के अनुसार संचालित की जा रही है। कुल सीटों में 20 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा, शेष सीटों पर अनारक्षित, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए है। प्रत्येक श्रेणी में 30 प्रतिशत सीटें छात्राओं और 5 प्रतिशत दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए भी हैं।

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विभागाध्यक्ष डॉ. कमलेश दशोरा ने बताया कि
सबसे ज्यादा डिमांड बी.फार्मा की है। इसमें प्रवेश 12वीं की मेरिट के आधार पर होता है। प्रवेश परीक्षा नहीं ली जाती। सीट अलाटमेंट के बाद विद्यार्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन और मेरिट सूची जारी की जाती है। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों को प्रोविजनल प्रवेश पत्र जारी कर फीस जमा करने की प्रक्रिया पूरी कराई जाती है। विभागाध्यक्ष डॉ. कमलेशा दसोरा के मुताबिक डी.फार्मा की 60 सीटों में से 31 पर प्रवेश हो चुके हैं। इस बार एम.फार्मा की 15 सीटों की स्वीकृति मिली है।

इंटर्नशिप पर जोर
फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया ने नया पाठ्यक्रम लागू किया है। इसमें एआई, मशीन लर्निंग, क्लिनिकल फार्मेसी और कंप्यूटर आधारित अध्ययन और प्रत्येक वर्ष मे दो अनिवार्य इंटर्नशिप भी शामिल की गई हैं।

मांग बढ़ी तो बायोटेक्नोलॉजी और जूलॉजी में सीटें बढ़ाईं

खुशबू छांजेड़ उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में विज्ञान संकाय के नए पाठ्यक्रमों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। खासकर बायोटेक्नोलॉजी और जूलॉजी विद्यार्थियों की पहली पसंद बनकर उभर रहे हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए बीएससी बायोटेक्नोलॉजी में सीटें 40 से बढ़ाकर 100 कर दी गई हैं। इस वर्ष पहली बार शुरू किए गए बीएससी जूलॉजी ऑनर्स में भी विद्यार्थी खूब प्रवेश ले रहे हैं। विद्यार्थियों का अच्छा प्रतिसाद इन पाठयक्रम को मिल रहा है।, बीएससी बायोटेक्नोलॉजी में अब तक 60 विद्यार्थियों ने प्रवेश ले लिया है। दूसरी मेरिट लिस्ट जारी होने पर बीच 40 सीटें भी भर जाने की संभावना है। नए पाठयक्रम बीएससी जूलॉजी ऑनर्स में 40 सीटों के विरुद्ध अब तक 15 प्रवेश हो चुके हैं। एमएससी बायोटेक्नोलॉजी और एमएससी जूलॉजी में 20-20 सीटें हैं, जिनमें क्रमश: 10-10 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है।

मेरिट के आधार पर हो रहे प्रवेश: दोनों कोर्स में प्रवेश प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी की जा रही है। आवेदन प्राप्त होने के बाद सीयूईटी स्कोर और 12वीं की मेरिट के आधार पर स्क्रीनिंग कर प्रथम और द्वितीय मेरिट सूची जारी की जाती है। चयनित विद्यार्थी के फीस जमा करते ही प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है।

कोविड के बाद बढ़ी बायोटेक्नोलॉजी की मांग : विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि कोविड-19 के बाद बायोटेक्नोलॉजी के प्रति रुझान काफी बढ़ा है। पिछले पांच वर्षों से विभाग की 40 सीटें पूरी तरह भर रही थीं। इस कारण इस साल इनकी संख्या बढ़ाकर 100 कर दी गई है और जिस तरह से प्रवेश हो रहे हैं, यह सीटें फुल होने की संभावना है।

आधुनिक प्रयोगशालाएं और अनिवार्य प्रशिक्षण
विवि में बायोटेक्नोलॉजी विभाग 2006 से संचालित हो रहा है। इसकी खासितय आधुनिक प्रयोगशालाओं में विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाना है। पाठ्यक्रम के दौरान विद्यार्थी के लिए एक वर्ष की इंडस्ट्री या हॉस्पिटल ट्रेनिंग अनिवार्य है। प्रत्येक सेमेस्टर में एमओओसीएस ऑनलाइन कोर्स करना भी जरूरी है। विद्यार्थियों के लिए नियमित रूप से इंटर्नशिप और जॉब फेयर भी होते हैं, जहां प्रशिक्षण के दौरान ही रोजगार के अवसर मिल जाते हैं।

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