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अखिल भारतीय कालिदास समारोह में श्रीकृष्ण काल का दिखाएंगे इतिहास

द्वापर युग का चार हजार साल पुराना इतिहास भी होगा प्रदर्शित

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दो हजार पुराने सिक्कों पर रास करते राधा कृष्ण दिखाई देंगे

सुधीर नागर उज्जैन। इसी माह 12 नवंबर से आरम्भ होने जा रहे सात दिवसीय अखिल भारतीय कालिदास समारोह के दौरान श्रीकृष्ण काल से जुड़ा चार हजार साल पुराना इतिहास पुरातात्विक प्रमाणों के रूप में भी देखा जा सकेगा। रास करते भगवान श्रीकृष्ण और राधा दो हजार साल पुराने सिक्कों पर दिखाई देंगे।

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कालिदास समारोह का उद्घाटन इस बार उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ करेंगे। साथ ही सिक्कों के संग्रह की दुर्लभ प्रदर्शनी का भी शुभारंभ करेंगे। यह प्रदर्शनी उज्जैन जिले के अंतर्गत महिदपुर के अश्विनी शोध संस्थान द्वारा लगाई जाती है। संस्थान प्रमुख आरसी ठाकुर ने बताया श्रीकृष्ण काल से जुड़े नए सिक्के और मुद्रिकाएं मिली हैं, जिनको पहली बार प्रदर्शनी में रखा जाएगा। 2100 साल पुराने ऐसे।पुरातात्विक प्रमाण भी मिले हैं, जिन पर श्रीकृष्ण और राधा रास कर रहे हैं।

कुछ मुद्राएं ऐसी हैं, जिन पर श्रीकृष्ण गाय चरा रहे हैं। 2100 साल पुरानी मिट्टी की एक ऐसी मुद्रिका भी मिली है, जिस पर ब्राह्मी में शंकराभ्यो नम: और नारायणाभ्यो नम: अंकित है। इसका अर्थ है भगवान शंकर की जय और भगवान विष्णु की जय। ये उज्जैन में बरसों पुरानी हरिहर मिलन की परम्परा का पुरातात्विक प्रमाण भी हैं। जो प्रमाण केंद्र सरकार के पास सुरक्षित, उनकी भी जानकारी
चार हजार साल पहले सिंधु घाटी सभ्यता से कुबेर पुत्रों का उद्धार करते श्रीकृष्ण के पुरातात्विक प्रमाण मिले थे। अश्विनी शोध संस्थान के निदेशक ठाकुर ने बताया ये प्रमाण भारत सरकार के पास सुरक्षित है, लेकिन प्रदर्शनी में इनकी भी जानकारी दी जाएगी।

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