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Sibling Rivalry: बच्चों की लड़ाई कैसे रोकें? चाइल्ड पैरेंटिंग टिप्स

Sibling Rivalry: क्या आपके बच्चे बात-बात पर झगड़ते हैं? जानें चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट के आसान पैरेंटिंग टिप्स

घर में दो या उससे अधिक बच्चों का होना खुशियों से भरा होता है, लेकिन उनके बीच छोटी-छोटी बातों पर बहस या झगड़ा होना भी आम बात है। कभी खिलौनों को लेकर, कभी टीवी के रिमोट पर तो कभी माता-पिता का ध्यान पाने के लिए बच्चे आपस में उलझ जाते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि हर झगड़े में माता-पिता का दखल देना हमेशा सही तरीका नहीं होता।

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चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट के मुताबिक, सही पैरेंटिंग अपनाकर बच्चों के बीच आपसी समझ और प्यार बढ़ाया जा सकता है।

हर झगड़े में रेफरी न बनें

विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता को हर छोटी बहस में तुरंत फैसला सुनाने की बजाय बच्चों को खुद बातचीत करके समस्या सुलझाने का मौका देना चाहिए। इससे उनमें समस्या का समाधान निकालने और एक-दूसरे की बात समझने की क्षमता विकसित होती है।

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‘Sibling Bubble’ क्यों है जरूरी?

चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट श्वेता गांधी के अनुसार, बच्चों को ऐसा समय देना चाहिए जब वे बिना किसी हस्तक्षेप के साथ खेलें, बातें करें और समय बिताएं। इसे वह ‘Sibling Bubble’ कहती हैं। इससे बच्चे आपसी मतभेद सुलझाना और एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाना सीखते हैं।

रिसर्च क्या कहती है?

विशेषज्ञों के मुताबिक, भाई-बहनों के बीच होने वाली बातचीत और छोटे-मोटे मतभेद बच्चों के सामाजिक और भावनात्मक विकास का हिस्सा होते हैं। इन्हीं अनुभवों से वे अपनी भावनाओं को व्यक्त करना, दूसरों की बात सुनना और समझौता करना सीखते हैं।

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बच्चों की लड़ाई कम करने के लिए अपनाएं ये टिप्स

1. रोज साथ खेलने का समय तय करें

हर दिन कुछ समय ऐसा रखें जब दोनों बच्चे मिलकर गेम खेलें, ड्रॉइंग करें या कोई मजेदार एक्टिविटी करें।

2. तुलना करने से बचें

एक बच्चे की तुलना दूसरे से करने के बजाय उनकी अलग-अलग खूबियों की सराहना करें। इससे ईर्ष्या और प्रतिस्पर्धा की भावना कम होती है।

3. सही व्यवहार सिखाएं

सिर्फ “झगड़ा मत करो” कहने की बजाय उन्हें बारी-बारी से खेलना, शांत तरीके से अपनी बात रखना और जरूरत पड़ने पर मदद मांगना सिखाएं।

4. अच्छे व्यवहार की तारीफ करें

जब बच्चे बिना झगड़े मिलकर कोई काम करें या एक-दूसरे की मदद करें, तो उनकी प्रशंसा जरूर करें। इससे सकारात्मक व्यवहार दोहराने की संभावना बढ़ती है।

5. हर बच्चे के साथ अलग समय बिताएं

हर दिन कुछ मिनट केवल एक बच्चे के साथ बिताएं। इससे दोनों को महसूस होगा कि वे माता-पिता के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

कब लें विशेषज्ञ की सलाह?

यदि बच्चों की लड़ाई बार-बार हिंसक हो रही हो, एक बच्चा लगातार दूसरे को नुकसान पहुंचा रहा हो, या झगड़ों का असर उनके व्यवहार, पढ़ाई या मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने लगे, तो किसी चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट या बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा।

निष्कर्ष

भाई-बहनों के बीच छोटी-मोटी नोकझोंक सामान्य है और यह उनके विकास का हिस्सा भी हो सकती है। धैर्य, सकारात्मक संवाद और सही पैरेंटिंग की मदद से बच्चे न केवल अपने झगड़े सुलझाना सीखते हैं, बल्कि उनके बीच मजबूत और स्वस्थ रिश्ता भी बनता है।

Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यदि आपके बच्चे के व्यवहार को लेकर गंभीर चिंता हो, तो किसी योग्य चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।

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