बकाया चालान नहीं भरा तो जब्त हो सकता है वाहन! सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने बकाया ई-चालान की वसूली के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को औचक वाहन जांच और आवश्यक प्रवर्तन कार्रवाई करने को कहा है। बार-बार यातायात नियम तोड़ने वालों पर लाइसेंस से जुड़ी कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए हैं।

सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बकाया ई-चालान की वसूली के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि केवल ई-चालान जारी करते रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगाए गए जुर्माने की वसूली के लिए भी ठोस व्यवस्था जरूरी है।
यह मामला सड़क सुरक्षा से जुड़ी एस. राजशेखरन की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। अदालत ने राज्यों को यातायात नियमों के उल्लंघन पर जारी ई-चालानों की वसूली के लिए प्रवर्तन व्यवस्था मजबूत करने को कहा है।
बकाया चालान मिलने पर वाहन जब्ती की कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वाहनों की औचक जांच करनी होगी। यदि जांच के दौरान किसी वाहन पर ई-चालान का बकाया पाया जाता है, तो संबंधित कानून और प्रक्रिया के तहत वाहन को जब्त करने समेत आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि ई-चालान जारी करने के बाद उसकी वसूली सुनिश्चित करना भी प्रवर्तन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बार-बार नियम तोड़ने वालों पर लाइसेंस कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन और नवीनीकरण पर रोक जैसे उपायों पर भी जोर दिया है।
साथ ही, अदालत ने वाहन से जुड़े जरूरी दस्तावेजों और सड़क सुरक्षा अनुपालन को प्रभावी तरीके से जांचने की व्यवस्था मजबूत करने की बात कही है।
PUC प्रमाणपत्र को लेकर भी सख्ती
निर्देशों में प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी PUC व्यवस्था को भी प्रवर्तन प्रणाली से जोड़ने पर जोर दिया गया है। अदालत ने कहा है कि नियमों का लगातार उल्लंघन करने वाले वाहनों के मामले में बिना उचित अनुपालन के PUC प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।
AI से होगी ट्रैफिक नियमों की निगरानी
सड़क सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने जोर दिया है। राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और संबंधित राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरणों को AI आधारित इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट सिस्टम विकसित करने की दिशा में काम करने को कहा गया है।
इस तरह की तकनीक के जरिए ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंपिंग और अन्य यातायात उल्लंघनों की पहचान कर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से कार्रवाई की व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट पहले भी इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट डिवाइस के जरिए ई-चालान जारी करने और संबंधित नियमों को लागू करने के निर्देश दे चुका है।
ट्रैफिक डेटा होगा ऑनलाइन
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और ई-चालान से संबंधित आंकड़ों के लिए ऑनलाइन डैशबोर्ड तैयार करने की व्यवस्था पर भी काम करना होगा। इसमें राज्य और राष्ट्रीय राजमार्ग स्तर पर प्रवर्तन से जुड़े आंकड़े नियमित रूप से अपडेट किए जाने हैं।
आपस में जुड़ेंगे ट्रैफिक सिस्टम
प्रवर्तन और सड़क सुरक्षा से जुड़े डेटा के रियल-टाइम आदान-प्रदान के लिए VAHAN, SARATHI, e-Challan, iRAD और राज्य एवं केंद्र के ट्रैफिक कंट्रोल रूम जैसी प्रणालियों को आपस में जोड़ने पर जोर दिया गया है।
इसका उद्देश्य यातायात नियमों के उल्लंघन की पहचान से लेकर ई-चालान और उसके अनुपालन तक पूरी व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी और तकनीक आधारित बनाना है।
सिर्फ कागजों पर नहीं, जमीन पर लागू हों निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा से जुड़े निर्देश केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। अदालत ने राज्यों और संबंधित अधिकारियों से इन निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने की अपेक्षा जताई है।
वाहन मालिकों के लिए क्या समझना जरूरी?
- बकाया ई-चालान को नजरअंदाज करना आगे चलकर परेशानी बढ़ा सकता है।
- वाहन जांच के दौरान बकाया चालान सामने आने पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो सकती है।
- बार-बार यातायात नियम तोड़ने पर ड्राइविंग लाइसेंस के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
- PUC और अन्य जरूरी दस्तावेजों को वैध रखना जरूरी है।
- ई-चालान और ट्रैफिक नियमों से जुड़े रिकॉर्ड तेजी से डिजिटल सिस्टम से जोड़े जा रहे हैं।









