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17 चाबियों से खोले थे जय ने 17 लॉकर

अगर कैश नहीं चुराया होता तो जेवरात चोरी का पता ही नहीं चलता

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उज्जैन। अपराध जगत में एक कहावत ख्यात है कि अपराधी कितना भी शातिर हो लेकिन वह एक ना एक सबूत छोड़ ही देता है, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की महानंदानगर शाखा में चोरी करने पहुंचा जय भावसार उर्फ जिशान भी इसीलिए गच्चा खा गया। उसने 4.25 करोड़ के जेवरात के साथ अगर 8 लाख रुपए के कैश पर हाथ साफ नहीं किया होता तो इस चोरी का पता ही नहीं चलता।

सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात 2.30 बजे बैंक में घुसे जय भावसार और अब्दुल्ला ने जेवरात चुराने के लिए 17 लॉकर खोले थे। यह जेवरात उन ग्राहकों के थे जिन्होंने बैंक से गोल्ड लोन लिया था। जेवरात की अलग पहचान के लिए ही इन्हें अलग-अलग लॉकर में रखा गया था। चूंकि, जय को बैंक शाखा के हर हिस्से की जानकारी थी इसलिए उसने आसानी से लॉकरों को 17 चाबियों से खोला और जेवरात बैग में भर लिए। जाते-जाते इन दोनों ने 8 लाख रुपए कैश भी उठा लिया।

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मंगलवार सुबह जब कर्मचारी शाखा पहुंचे और ग्राहकों को देने के लिए तिजोरी से कैश निकालने की प्रक्रिया शुरू की। कैशियर अभिनव के हाथ-पैर तब फूल गए जब उसे तिजोरी में कैश नहीं मिला। ऐसे में उसने सेवा प्रबंधक सुरेंद्र कुमार माधव, शाखा प्रबंधक पायल माहेश्वरी को सूचना दी। कैश चोरी से हतप्रभ बैंक प्रबंधन ने पुलिस के साथ विभागीय अधिकारियों को भी चोरी की सूचना दी। इसके बाद वरिष्ठ अफसर बैंक पहुंचे और फिर लॉकर खोलने का काम शुरू हुआ।

गोल्ड लोन के लॉकर जब खुलने शुरू हुए तो 17 लॉकर्स से आभूषण नदारद थे। इनमें रखने जेवरात का ब्योरा दस्तावेजों से जुटाया गया तो पता चला 4.700 किलो जेवरात चोरी हुए हैं। चूंकि, चोरी करोड़ों की थी और पुलिस ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया। जिसके बाद तेजी से तफ्तीश शुरू हुई और कडिय़ां जोड़ी जाने लगीं। आधुनिक टेक्नोलॉजी, सीसीटीवी कैमरों के फुटेज ने पुलिस का काम आसान कर दिया। जय भावसार के टूटते ही खुलासा हो गया।

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