भस्मार्ती के नाम पर फिर फ्रॉड, मुंबई की महिला श्रद्धालु से हड़प लिए 4,250 रुपए

केएसएस का पूर्व कर्मचारी है मुख्य आरोपी, मोबाइल लोकेशन से तलाश जारी

अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। भगवान बाबा महाकाल के दरबार में दर्शन और भस्मारती के नाम पर बाहर से आने वाले भोले-भाले श्रद्धालुओं को ठगने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला मुंबई से अपने परिवार के साथ दर्शन करने आईं महिला श्रद्धालु धीरज पति संजय चौरगे के साथ 4,250 की धोखाधड़ी का है।
पीडि़त महिला श्रद्धालु धीरज चौरगे के अनुसार, उनके रिश्तेदारों की पहचान पूर्व में महाकाल मंदिर के एक पूर्व कर्मचारी संतोष अकोदिया से हुई थी। रिश्तेदारों से मिले मोबाइल नंबर के आधार पर उन्होंने 24 मई को संतोष से संपर्क किया। आरोपी ने तीन श्रद्धालुओं के भस्म आरती दर्शन कराने के बदले 4,250 की मांग की।
श्रद्धालु ने पहली किस्त में 3,000 और दो दिन बाद शेष 1,250 ऑनलाइन गूगल पे के माध्यम से ट्रांसफर कर दिए। जब 29 मई को परिवार उज्जैन पहुंचा और संतोष से संपर्क करने का प्रयास किया, तो उसने फोन उठाना बंद कर दिया और बाद में अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया। ठगी का अहसास होने पर पीडि़ता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
महाकाल थाना प्रभारी गगन बादल ने बताया कि महिला की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने महाकाल मंदिर समिति को पूरे मामले की जानकारी देकर आधिकारिक आवेदन मांगा था। दो दिन बीत जाने के बाद भी समिति की ओर से कोई शिकायत या आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद पुलिस ने सीधे महिला श्रद्धालु की शिकायत के आधार पर आरोपी संतोष अकोदिया के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया।
पहले कंप्यूटर ऑपरेटर था आरोपी
जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी संतोष अकोदिया पूर्व में महाकाल मंदिर में कंप्यूटर ऑपरेटर रह चुका है। वह केएसएस कंपनी की ओर से यहां नियुक्त किया गया था। लेकिन उसकी हरकतें ठीक नहीं होने के कारण उसे हटा दिया था। मंदिर के तौर-तरीकों से वाकिफ होने के कारण उसने इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस मोबाइल लोकेशन के आधार पर उसकी तलाश कर रही है। टीआई बादल के मुताबिक 1 जनवरी से अभी तक करीब 10 से अधिक मामले मंदिर में दर्शन और आरती के नाम पर धोखाधड़ी के आ चुके हैं। इन पर कार्रवाई भी हो रही है।
अप्रैल-मई में इन मामलों की सिर्फ शिकायतें हुईं
राजस्थान-यहां से आए एक श्रद्धालु परिवार से वीआईपी दर्शन और आरती पास दिलाने के नाम पर हजारों रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए गए।
महाराष्ट्र के एक दंपती को अंतिम बची हुई सीट का झांसा देकर एडवांस राशि जमा करवाई गई, जिसके बाद आरोपी का मोबाइल बंद हो गया।
भोपाल निवासी एक युवक से ड्रेस कोड और स्पेशल एंट्री के नाम पर अलग-अलग किश्तों में मोटी रकम वसूली गई।
दिल्ली के एक श्रद्धालु को झांसे में लेकर बकायदा एक फर्जी लिंक भेजी गई और ऑनलाइन पेमेंट कराकर ठगी को अंजाम दिया गया।
इंदौर की एक महिला श्रद्धालु पर व्हाट्सएप कॉल कर तत्काल बुकिंग कराने का दबाव बनाया गया और जल्दबाजी में रुपए ट्रांसफर करा लिए गए।
सूरत और अहमदाबाद शहरों से आए दो परिवारों ने भी फर्जी एजेंटों के खिलाफ महाकाल थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
(इन मामलों में फरियादी बाहर के थे और उनके द्वारा रुचि नहीं लिए जाने और आरोपी की अधूरी जानकारी के कारण एफआईआर नहीं हुई।)
जांच में सामने आया ठगी का कॉमन पैटर्न
महाकाल थाना पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात साफ हो गई है कि यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित साइबर नेटवर्क काम कर रहा है। जालसाज सबसे पहले सोशल मीडिया और गूगल पर महाकाल दर्शन के नाम से फर्जी वेबसाइट या मोबाइल नंबर डाल देते हैं, जिसे सच मानकर श्रद्धालु खुद उनसे संपर्क करते हैं।
श्रद्धालुओं को फंसाने के लिए सीमित सीटें बची हैं, वीआईपी परमिशन और ऑफलाइन कोटा जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर जल्दबाजी में फैसला लेने पर मजबूर किया जाता है। ठग पहले रजिस्ट्रेशन के नाम पर छोटी राशि मांगते हैं, फिर ड्रेस कोड, प्रोटोकॉल और अन्य बहानों से धीरे-धीरे रकम बढ़ाते चले जाते हैं। आरोपी जानबूझकर दूसरे राज्यों के श्रद्धालुओं को निशाना बनाते हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि दर्शन के बाद वे वापस लौट जाएंगे और कानूनी कार्रवाई के लिए बार-बार उज्जैन नहीं आ पाएंगे।
एक महीने में ठगी की तीन वारदात, पांच महीने में 10
29 मई- मुंबई की महिला से मंदिर के पूर्व कर्मचारी संतोष अकोदिया द्वारा 4250 रुपए की ठगी।
17-18 मई- वडोदरा (गुजरात) की गुजरात की वीणा धनेरिया से श्रद्धालुओं से ऑनलाइन सर्चिंग के दौरान दीपक मिश्रा नामक ठग ने संपर्क किया। उसने दर्शन, प्रोटोकॉल और सेव मनी के नाम पर 42,000 से अधिक की मोटी रकम ऐंठ ली थी।
13 मई- महाराष्ट्र के 3 श्रद्धालुओं को सुरक्षाकर्मियों ने नंदी हॉल से अनाधिकृत रूप से दर्शन करते पकड़ा था। उन्होंने आशुतोष शर्मा नामक व्यक्ति को भस्मारती और दर्शन के लिए पैसे देना कबूला था। सुपरवाइजर मुकेश बोगना की शिकायत पर आशुतोष के खिलाफ मामला दर्ज हुआ।
महाकाल पुलिस के मुताबिक 1 जनवरी से पांच महीने में 10 से अधिक एफआईआर मंदिर में दर्शन/भस्मारती के नाम पर धोखाधड़ी की शिकायतेें हुई हैं।









