अब नई रजत पालकी में नगर भ्रमण करेंगे भगवान महाकाल

20 किलो से अधिक चांदी व सागौन की लकड़ी का उपयोग, गुप्तदान से श्रद्धालु ने कराई तैयार

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। भगवान महाकाल सावन-भदौ व कार्तिक-अगहन मास के अलावा अलग-अलग अवसर पर रजत पालकी में विराजमान होकर नगर भ्रमण करते हैं। एक श्रद्धालु ने गुप्त दान देकर नई पालकी तैयार कराई। जिसका मंदिर के पंडितों ने विधिवत पूजन अर्चन किया।
पं. भावेश व्यास, पं. लोकेश व्यास, पं. शरदचंद्र व्यास और दर्शन व्यवस्था प्रभारी राकेश श्रीवास्तव की प्रेरणा से भिलाई छत्तीसगढ़ में रहने वाले श्रद्धालु ने भगवान महाकाल के लिए नई पालकी बनवाने का निर्णय लिया। हरीश सोनी को राजाधिराज के वैभव अनुसार पालकी निर्माण का कार्य सौंपा गया। करीब तीन महीने की तैयारी के बाद उक्त पालकी बनकर तैयार हुई जिसकी लागत 23 लाख रुपए आई है।
इन सामग्री का हुआ उपयोग
राकेश श्रीवास्तव ने बताया भगवान की पालकी बनाने में 20 किलो 612 ग्राम चांदी का उपयोग हुआ है। इसके अलावा सागौन की लकड़ी व स्टील का स्ट्रक्चर में उपयोग किया गया है। पालकी में बैठक की जगह 3 फीट चौड़ी व 5 फीट लंबी है। उठाने वाले हत्थे में सिंह का मुख बनाया गया है। इन्हें मिलाकर कुल लंबाई 17 फीट और चौड़ाई साढ़े तीन फीट होती है।
मंदिर समिति करेगी निर्णय
पं. भावेश व्यास ने बताया कि पालकी का दोपहर में पूजन किया जा रहा है। सोमवार को भगवान महाकालेश्वर की सवारी निकलना है। नई पालकी का सवारी में उपयोग होगा या नहीं इसका निर्णय मंदिर समिति द्वारा लिया जाएगा। पालकी पूरी तरह बनकर तैयार है।









