दुष्कर्म का आरोपी ज्ञानदास साधु समाज से बहिष्कृत, मठ-आश्रमों में प्रवेश पर लगी रोक

उज्जैन। सदावल क्षेत्र स्थित दादूराम आश्रम के महामंडलेश्वर ज्ञानदास को साधु समाज ने बहिष्कृत कर दिया है। उस पर महाकाल थाने में रेप का प्रकरण दर्ज किया है। स्थानीय अखाड़ा परिषद ने निर्मोही अखाड़े के ज्ञान दास के उज्जैन स्थित सभी आश्रमों, मठों और अखाड़ों के भंडारों में प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी है। उसे महामंडलेश्वर पद से तत्काल प्रभाव से हटाने के लिए अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र भी भेजा है।
ज्ञानदास पर अखाड़े में रहने वाली एक युवती ने रेप का आरोप लगाया है। युवती के बयान और मेडिकल जांच के बाद महाकाल पुलिस ने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। प्रकरण दर्ज होने के बाद ज्ञानदास फरार हो गया है।
रविवार को स्थानीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत डॉ. रामेश्वर दास और महामंत्री महंत रामेश्वर गिरी ने बताया कि ज्ञानदास के घटनाक्रम को लेकर स्थानीय अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों ने बैठक की और फैसला किया कि उसका कृत्य समूचे संत समाज और सनातन परंपरा के लिए अशोभनीय एवं कलंककारी है। इसी को ध्यान में रखते हुए सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
पद से हटाने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजा पत्र: ज्ञान दास को निर्मोही अखाड़े के महामंडलेश्वर पद से तत्काल प्रभाव से पदमुक्त करने के लिए स्थानीय अखाड़ा परिषद की ओर से अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास महाराज को पत्र भेजा है। ज्ञान दास उज्जैन में स्थानीय अखाड़ा परिषद के किसी भी धार्मिक आयोजन, मठ, अखाड़े या आश्रम में प्रवेश नहीं कर सकेगा।
सख्त निर्णय जरूरी था
ज्ञानदास ने संत समाज की मर्यादाओं का उल्लंघन कर घिनौना कृत्य किया है। इस कारण उसे प्रतिबंधित किया है। पद से हटाने के लिए भी निर्मोही अखाड़ा के अध्यक्ष को पत्र लिखा है।
-महंत डॉ. रामेश्वर दास महाराज
अध्यक्ष स्थानीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष









