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सुरक्षाकर्मियों को मिले रैनकोट, क्वालिटी से कोई खुश नहीं

सावन में नए कर्मचारी बढ़ाने के लिए अभी तक नहीं दी डिमांड, ऐसे में भर्ती कब करेंगे

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सावन 12 दिन शेष

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर में सावन की तैयारियां जोरों पर है। बारिश में ड्यूटी देने के लिए सुरक्षा कर्मियों को एजेंसी ने नए रैनकोट भेजे हैं। लेकिन क्वालिटी देखकर कोई भी कर्मचारी खुश नहीं है। कहने को तो कोर कंपनी यह रैन कोट मुफ्त दे रही है, जबकि यह सच नहीं है। कंपनी पहले ही इसका पैसा वसूल चुकी है।

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कोर कंपनी ने जब सुरक्षा गार्डों की भर्ती की थी, उस वक्त सभी से ५५०० रुपए जमा करवाए थे। जिसमें दो जोड़ यूनिफॉर्म, दो जोड़ जूते, व्हिसिल, टोपी, ठंड के लिए जर्सी, बारिश के लिए रैनकोट आदि शामिल था। वही रैनकोट कंपनी ने अब भेजे हैं। सुरक्षा गार्डों का कहना है कि रैनकोट की क्वालिटी देखकर लगता नहीं है कि वो इस साल की बारिश भी झेल पाएंगे। अगले साल उपयोग करने का तो सवाल हीं नहीं। गौरतलब है कि करीब अभी तक करीब 900 रैनकोट सुरक्षाकर्मियों को बांटे जा चुके हैं।

असमंजस : नए कर्मचारियों की भर्ती करें या नहीं
सावन-भादौ में श्री महाकालेश्वर मंंदिर सर्वाधिक भीड़भरा होता है। एक दिन में दो लाख के आसपास दर्शनार्थियों का आना सामान्य बात है। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था, लड्डू निर्माण, अन्नक्षेत्र से लेकर सफाई आदि के लिए दो महीने के लिए कर्मचारी बढ़ाए जाते हैं। इस दौरान करीब दो सौ नए सुरक्षाकर्मी और अन्य विभागों के लिए भी करीब इतने ही और कर्मचारियों की जरूरत होती है। समिति द्वारा एजेंसियों को अभी तक नए कर्मचारियों की डिमांड नहीं दी गई है। ऐसे में एजेंसी के जिम्मेदार असमंजस में हैं कि नए कर्मचारियों की भर्ती करें या नहीं। समस्या यह है कि अगर अभी भर्ती नहीं की तो ऐनवक्त पर कर्मचारी कहां से आएंगे और नई भर्ती करने के बाद अगर डिमांड नहीं आई तो भी वेतन देने की मुसीबत होगी। सूत्रों के मुताबिक हर साल सावन-भादौ माह के दौरान करीब तीन से चार सौ कर्मचारी बढ़ाए जाते हैं।

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1अगस्त से शुरू हो जाएगी दर्शनार्थियों की भीड़
सावन 30 जुलाई से शुरू हो रहा है। दो दिन बाद 1 अगस्त से तीन दिन का वीकेंड शुरू होगा। ३ अगस्त को सावन सोमवार है। ऐसे में 31 की रात से काफी संख्या में दर्शनार्थियों की भीड़ उज्जैन आना शुरू हो जाएगी। इसके पहले मंदिर समिति को हर मोर्चा मजबूत करना होगा। ताकि ऐन वक्त पर परेशानी न हो।

दानदाता के सामने ही परखी जाएगी सोने-चांदी की शुद्धता
भगवान महाकाल के मंदिर में दान स्वरूप प्राप्त होने वाले सोने और चांदी के आभूषणों की शुद्धता अब दानदाता की मौजूदगी में ही कैरेटमीटर मशीन से जांची जाएगी। कैरेटमीटर मशीन सावन के पहले मंदिर परिसर में स्थापित कर दी जाएगी। इसके लिए कैरेटमीटर मशीन महाकाल मंदिर कार्यालय में आ चुकी है। कोठार शाखा में इसके लिए एसी रूम तैयार हो रहा है।

जहाँ इसे इंस्टॉल किया जाएगा। कैरेट मीटर मशीन एक्स-रे बीम तकनीक पर काम करती है। जब इस मशीन से निकलने वाले बीम धातु पर पड़ते हैं, तो धातु के परमाणु उत्तेजित हो जाते हैं और एक विशेष ऊर्जा छोड़ते हैं। इस ऊर्जा के विश्लेषण से यह मशीन कुछ ही सेकंड में सोने और चांदी की वास्तविक शुद्धता का सटीक प्रतिशत बता देती है। धातु परीक्षण की यह पूरी प्रक्रिया अधिकतम तीस सेकंड में हो जाती है। अभी तक महाकाल मंदिर में दान के रूप में प्राप्त होने वाले आभूषणों के बारे में रसीद या रिकॉर्ड में सोने जैसा या चांदी जैसा लिखकर कोठार में जमा कर लिया जाता था। शुद्धता की तत्काल वैज्ञानिक जांच की व्यवस्था नहीं होने से वास्तविक गुणवत्ता का पता बाद में चलता था।

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