शिप्रा जल स्नान योग्य, आचमन (पीने) लायक नहीं

शिप्रा जल को लेकर अखाड़ों और पुजारी महासंघ में टकराव

अखाड़ा परिषद हाईकोर्ट जाने की तैयारी में, निरीक्षण भी संभव
अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। शिप्रा के पानी को लेकर अखाड़ा परिषद और पुजारी महासंघ में टकराव के आसार पैदा हो गए हैं। पुजारी महासंघ ने अखाड़ा परिषद पर अप्रत्यक्ष रूप से वार करते हुए कहा है कि शिप्रा का जल आचमन योग्य था, है और रहेगा। संघ ने बिना किसी का नाम लिए यहां तक कहा है कि पहले अपने मन की मैल साफ की जाए। कुछ समय पहले अखाड़ा परिषद ने कहा है कि रामघाट पर शिप्रा का पानी आचमन योग्य नहीं है। अखाड़ा परिषद इस मामले को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकती है। त्रिवेणी से लिए गए शिप्रा जल के नमूने में पानी नहाने योग्य तो है लेकिन पीने योग्य नहीं।
सिंहस्थ 2028 से पहले शिप्रा नदी को साफ स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त करने के लिए करोड़ों रुपए की योजनाएं धरातल पर ला रही है, इसलिए जब तक ये योजनाएं आकार न ले लें, तब तक शिप्रा के पानी को लेकर मतभेद उत्पन्न होते रहेंगे, किंतु ये सच है कि सिंहस्थ में शिप्रा का पानी जैसा साफ स्वच्छ रहता है, वैसा पूरे बारह महीने नहीं रह पाता। पिछले सिंहस्थ 2016 में भी सरकार ने महाकुंभ से पहले शिप्रा को प्रवाहमान कर दिया था, लेकिन बाद में शिप्रा वापस वैसी दिखाई नहीं दी।
इसकी वजह यह रही कि योजनाएं सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए तात्कालिक बनाई गईं। जरूरत दूरगामी योजना की है। वर्तमान में शिप्रा नदी का पानी आस्था के साथ आचमन किया जा सकता है, लेकिन वैज्ञानिक कसौटी पर परखा जाए तो कई कमियां सामने आ सकती हैं। त्रिवेणी से सिद्धवट के बीच कई जगह शिप्रा में अशुद्धियां और प्रदूषण है। गंदे नालों का पानी अभी भी पूरी तरह शिप्रा में मिलना बंद नहीं हो सका है। पिछले सिंहस्थ तक शिप्रा पर करीब 3 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन अब करोड़ों रुपए की नई योजनाएं लाना पड़ी हैं। 432 करोड़ रुपए की नर्मदा शिप्रा लिंक योजना भी कारगर साबित नहीं हो सकी है।
ये किया जाए
1. शिप्रा नदी प्राधिकरण बनाया जाए जो निरंतर शिप्रा जल की शुद्धता को लेकर काम करे।
2. प्राधिकरण में विशेषज्ञ, सेवा निवृत्त अधिकारी और इंजीनियरों की टीम बनाई जाए।
3. प्राधिकरण को शिप्रा के पानी की शुद्धता के लिए जवाबदेह बनाया जाए।
4. योजनाएं ऐसी बनाई जाएं, जिनसे पानी का शुद्धिकरण हो सके।
100 करोड़ में प्रवाहमान हो सकती थी शिप्रा नदी
पिछले सिंहस्थ में कान्ह डायवर्शन योजना पर करीब 100 करोड़ रुपए खर्च किए गए, लेकिन यह पूरी तरह नाकामयाब हो गई। बारिश में यह उपयोगी सिद्ध नहीं हो सकी। वास्तव में खान नदी के पानी को डायवर्ट करने की जगह उसे शिप्रा में मिलने से पहले साफ और प्रदूषण मुक्त किया जाना चाहिए। 100 करोड़ रुपए में अगर त्रिवेणी से पहले बोरिंग कर दिए जाते तो साफ स्वच्छ पानी मिल सकता था।
अब गारंटी ली जाए…. पिछली योजनाओं और गलतियों से सबक लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को नई योजनाओं के लिए जिम्मेदार अफसरों से गारंटी लेना चाहिए कि वे उपयोगी साबित होगी, अन्यथा राशि की भरपाई निर्णय लेने वाले अधिकारियों से की जाए। अन्यथा पहले की तरह करोड़ों रुपए बर्बाद हो सकते हैं।
अब इन बड़ी योजनाओं पर काम
919 करोड़ की कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना का चल रहा काम। इससे खान नदी का प्रदूषित पानी डायवर्ट होगा।
614 करोड़ 53 लाख की सेवरखेड़ी- सिलारखेड़ी मध्यम सिंचाई परियोजना पर भी काम।
474 करोड़ की दूसरी सीवरेज पाइपलाइन परियोजना
शिप्रा जल: आज कहां क्या स्थिति
रामघाट: ठहरा हुआ पानी, मिट्टी ज्यादा
रामघाट पर शिप्रा का पानी ठहरा हुआ है। पुल निर्माण के कारण पानी में मिट्टी अधिक है। कई जगह हार फूल और कर्मकाण्ड की सामग्रियां भी दिखाई दीं। वर्तमान में सिर्फ श्रद्धा से ही आचमन किया जा सकता है। घाट को और अधिक साफ सुथरा बनाने की जरूरत।
सिद्धवट: साफ दिखाई देती है गंदगी
सिद्धवट घाट पर भी शिप्रा का पानी संतोषजनक नहीं है। यहां अगर कांच की बोतल में पानी लेकर देखा जाए तो गंदगी को खुली आंखों से भी देखा जा सकता है। अगर माइक्रोस्कोप से देखा जाए तो कई बैक्टीरिया भी दिखाई दे सकते हैं। यहां पिंडदान और तर्पण की सामग्री ज्यादा प्रवाहित की जाती है, जिससे बैक्टीरिया उत्पन्न होते हैं।
ऋणमुक्तेश्वर: गंदे नालों का मिल रहा पानी
ऋणमुक्तेश्वर पर भी शिप्रा के पानी की स्थिति संतोषजनक नहीं है। चिंता की बात यह कि जुना सोमवारिया आदि क्षेत्रों का प्रदूषित पानी शिप्रा में मिल रहा। गंदे नाले का पानी शिप्रा में ही मिल रहा। इससे पानी प्रदूषित होकर मंगलनाथ की ओर प्रवाहित हो रहा।
अपस्ट्रीम में पानी ठीक, डाउन स्ट्रीम में खराब
सोमवार सुबह शिप्रा के अपस्ट्रीम एरिया (त्रिवेणी) से लिए गए सेंपल की ताजा रिपोर्ट बताती है कि पानी में बॉयोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड का स्तर 6.1 (एमजी/लि.), केमिकल ऑक्सीजन डिमांड का स्तर 24.6 (एमजी/लि.), पानी में ऑक्सीजन की स्थिति 7.6 (एमजी/लि.), अम्ल व क्षारीय क्षमता 8.6 (एमजी/लि.) है। यह स्थिति जल के स्नान योग्य होने की मानी जाती है, आचमन (पीने) की नहीं। गौर करने वाली बात है कि रिपोर्ट अपस्ट्रीम एरिये की है जबकि शिप्रा की स्थिति डाउन स्ट्रीम में खराब है।









