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शिप्रा की काई पार्षद की जान पर बन आई

उज्जैन। शिप्रा मैया की दुर्दशा को देखने वाला कोई नहीं है। कार्तिक मास चल रहा है। शिप्रा स्नान का बड़ा महत्व है। उन धर्मालुओं से पूछिए जो गंदेले पानी में, काई में, कीचड़ में और बदबू में स्नान कर रहे हैं। नगर निगम के अधिकारी गंदगी साफ करवा सकते थे। नहीं की।

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पार्षद रजत मेहता अपने पार्षद साथियों के साथ कार्तिक मेले की व्यवस्था देख कर आ रहे थे। शिप्रा तट पर पहुंचे। सिढ़ी पर पैर रखा। काई से फिसले और गिर गए, साथियों ने उठाया। चल नहीं पा रहे थे। चोटिल हो गए। इलाज चल रहा है। अब शायद शिप्रा के आंचल से गंदगी साफ होगी।

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