श्री हरि अब योग निद्रा में, श्री महाकाल ने संभाला सृष्टि का भार

119 दिन बाद देवप्रबोधनी एकादशी से शुरू होंगे मांगलिक कार्य
अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। देवशयनी एकादशी पर शनिवार को भगवान श्रीहरि विष्णु योग निद्रा में चले गए हैं। सृष्टि का भार अब भगवान शिव (श्री महाकालेश्वर) ने संभाल लिया है। शनि एकादशी होने के कारण श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार शाम को एकादशी मनाई गई। रविवार को रवि प्रदोष के अवसर पर भगवान शिव ने सृष्टि का भार संभाल लिया।
शनिवार को अनुराधा नक्षत्र, अमृत योग और ब्रह्म योग के दुर्लभ संयोग में 119 दिनों के लिए भगवान श्रीहरि विष्णु योगनिद्रा में गए हैं। इसके साथ ही चातुर्मास का शुभारंभ हो गया और विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत सहित सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार देवउठनी एकादशी तक भगवान शिव सृष्टि के संचालन का दायित्व संभालेंगे। अब २१ नवंबर देव प्रबोधिनी एकादशी पर श्री हरि विष्णु योग निद्रा से जागेंगे और मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होगा।
जिम्मेदारी सौंपते वक्त होता है हरिहर मिलन
महाकाल मंदिर के पं. महेश पुजारी ने बताया कि देवशयनी एकादशी पर सृष्टि के भार संभालने की परंपरा गोपनीय होती है। इस दिन कोई आयोजन नहीं होगा। सृष्टि का भार सौंपते वक्त जरूर हरिहर मिलन होता है और श्री महाकालेश्वर गोपाल मंदिर जाकर प्रतीकात्मक रूप से गोपालजी को सृष्टि का जिम्मा सौेंपते हैं। रविवार को मंदिर में रवि प्रदोष का पर्व मनाया जा रहा है। शाम तक भगवान महाकाल व्रत रखेंगे और प्रदोष पूजन के बाद उन्हें भोग लगेगा।
एकादशी पर मंदिरों में आयोजन
देवशयनी एकादशी पर विभिन्न वैष्णव मंदिरों में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान विष्णु का शयनोत्सव मनाया गया। विशेष पूजन, विष्णु सहस्त्रनाम, श्रीसूक्त पाठ, भजन-कीर्तन और महाआरती के साथ श्रद्धालुओं ने भगवान को शयन कराया। मंगलनाथ मार्ग अंकपात स्थित ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में शनिवार को एकादशी पर दिनभर धार्मिक आयोजन हुए। सुबह भगवान को विशेष पौषाक पहनाकर फूलों से श्रृंगारित किया गया। इसके बाद पूजन, आरती और भोग लगाया गया। दिनभर प्रसाद वितरण हुआ। दोपहर बाद महिलाओं ने यहां भजन-कीर्तन कर एकादशी उत्सव मनाया। धर्माचार्य पं. हरिनारायण शास्त्री के अनुसार देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं। इस अवधि में जप, तप, दान, भागवत पाठ, विष्णु सहस्त्रनाम और सत्संग का विशेष महत्व माना जाता है।
खाटू श्याम मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
हाटकेश्वर विहार स्थित सिद्धपीठ श्री खाटू श्याम मंदिर में देवशयनी एकादशी पर देर रात तक मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और बाबा श्याम के जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय बना रहा। बाबा श्याम को नवीन मुकुट धारण कराया गया। रंग-बिरंगे सुगंधित पुष्पों, आकर्षक वस्त्रों और आभूषणों से सुसज्जित बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत सुबह मंगला आरती से हुई, जिसके बाद मंदिर के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए। पूरे दिन भक्तों ने बाबा के दर्शन कर सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की। संध्याकालीन आरती के बाद अखंड ज्योत प्रज्वलित की गई और रात 10.30 बजे तक भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। अन्य श्याम मंदिरों में भी आयोजन हुए।









