शनिवार सुबह 3 घंटे में 7 लोगों पर स्ट्रीट डॉग का हमला, 3 दिन में 80 लोग घायल

महाकाल मंदिर के बाहर दिल्ली के दर्शनार्थी को डॉग ने लहूलुहान किया, चरक में इलाज

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। शनिवार सुबह महाकाल मंदिर क्षेत्र में दिल्ली के दर्शनार्थी पर कुत्ते ने हमला कर दिया। परिजन उसे लेकर चरक अस्पताल पहुंचे। दर्शनार्थी का पैर कुत्तों ने नोंचा हैं। शनिवार को सुबह 11 बजे तक 7 लोग डॉग बाइट के शिकार हुए हैं। दर्शनार्थी के अलावा पाण्डयाखेड़ी, फ्रीगंज सब्जी मंडी, ऋषिनगर, फाजलपुरा, चिंतामन व ग्रामीण क्षेत्र के लोग कुत्तों के हमले में घायल हुए हैं।
डॉग बाइट की समस्या शहर में बढ़ती ही जा रही है। हर गली-सड़क में वाहनों पर स्ट्रीट डॉग के झुंड हमला कर रहे हैं और लोगों को गिरा कर घायल कर रहे हैं। कुछ डॉग बाइट के शिकार भी हो रहे हैं। चरक अस्पताल के रिकार्ड के मुताबिक पिछले तीन दिन से रोज करीब 20 से अधिक मामले डॉग बाइट के आ रहे हैं। जिसमें 12 नवंबर को 32, 13 नवंबर को 24 और 14 नवंबर को 23 मामले डाूग बाइट के सामने आए थे।
शहर में स्ट्रीट डॉग की समस्या बढ़ गई है। खासकर ठड के दिनों में डॉग अधिक आक्रामक हो रहे हैं। डॉग बाइट और हमले का शिकार अब वाहन चालक अधिक हो रहे हैं। सड़क से गुजरने वाले वाहनों पर कुत्तों के झुंड हमला करते हैं। ऐसे में वाहन चालक या तो दुर्घटना का शिकार होते हैं या फिर डॉग बाइट का। चरक अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि पिछले दिनों भैरवगढ़, सेठी नगर, नानाखेड़ा, शास्त्री नगर, श्रीकृष्णा कॉलोनी, प्रेम नगर, नलिया बाखल, मोहन नगर, महाकाल क्षेत्र, बापू नगर, कानीपुरा, ऋषि नगर, कोयला फाटक, हरी फाटक और पंवासा आदि इलाकों से डॉग बाइट के मामले बढ़े हैं। इन क्षेत्रों में खासकर रात के वक्त कुत्तों के झुंड लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं। बचने के लिए लोग रास्ता बदलकर गुजर रहे हैं।
नगर निगम ने नसबंदी के लिए वाहन बढ़ाया
डॉग कंट्रोल के लिए नगर निगम ने चेरिटेबल वेलफेयर सोसायटी फॉर ह्यूमन काइंड एंड ऐनिमल्स को कांटेक्ट दिया है। संस्था शहर से डॉग पकड़कर सदावल रोड स्थित डॉग हाउस लाती है। वहां उनकी नसबंदी कर तीन-चार दिन रखा जाता है। फिर वापस उसी इलाके में छोड़ दिया जाता है जहां से पकड़ा था। वर्तमान में निगम ने एक वाहन दे रखा था, दो दिन पहले एक वाहन और बढ़ाया है। ऐसे में अब रोज करीब 15-20 डॉग को पकड़ा जा सकेगा।
यह कदम ज्यादा कारगर नहीं
नगर निगम द्वारा जो कदम डॉग कंट्रोल के लिए उठाया जा रहा है वह ज्यादा कारगर नहीं है। क्योंकि किसी भी गली में एक भी डॉग नसबंदी से बच जाता है तो उसके कारण बर्थ कंट्रोल प्लानिंग बिगड़ जाती है।
समस्या का हल : हर मोहल्ले में कैंप लगे तो कंट्रोल होगे स्ट्रीट डॉग
सहायक पशु चिकित्सक डॉ. अभिनव सोनी बताते हैं डॉग कंट्रोल के लिए प्रत्येक मेल डॉग की एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सर्जरी और एआरवी (एंटी रैबिज वैक्सीन) होना जरूरी है। फिलहाल जिस संख्या में यह किया जा रहा है वो पर्याप्त नहीं है। बड़े शहरों की तरह हर मोहल्ले में कैंप लगाकर उस दिन उस गली-मोहल्ले के सभी डॉग को पकड़कर मौके पर ही उनकी एबीसी सर्जरी व एआरवी करना होगा। बर्थ कंट्रोल में यह काफी कारगर उपाय है।
पशु चिकित्सक डॉ. बबीता कैथल के मुताबिक एबीसी, एआरवी के साथ ही स्ट्रीट डॉग को पर्याप्त खाना मिले। ठंड से बचने के लिए जूट के टाट भी जनसहयोग से शहर में जगह-जगह लगाए जा सकते हैं जिससे स्ट्रीट डॉग को राहत मिलेगी।









