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कॉलेजों में छात्र राजनीति की वापसी, विद्यार्थी संगठनों ने मैदान संभाला, अपनी तैयारी तेज की

छात्र चुनाव की हलचल : 2017 में हुए थे अप्रत्यक्ष प्रणाली से अंतिम बार चुनाव, छात्र राजनीति से उभरे कई नेता

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छात्र राजनीति से उभरे कई नेता, इनमें सीएम डॉ. मोहन यादव भी

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। 9 साल बाद एक बार फिर उज्जैन में छात्र राजनीति गरमाने वाली है। सरकार के अगले महीने छात्रसंघ चुनाव कराने के हाईकोर्ट में दिए हलफनामे के बाद उज्जैन में भी विद्यार्थी संगठनों ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि चुनाव डायरेक्ट (प्रत्यक्ष) होंगे या इन डायरेक्ट (अप्रत्यक्ष)। 2017 में इन डायरेक्ट चुनाव हुए थे। भाजपा और कांग्रेस से जुड़े विद्यार्थी संगठन डायरेक्ट चुनाव के पक्ष में है। इसकी वजह है नया नेतृत्व तैयार करना। उज्जैन में छात्र राजनीति ने कई नामचीन चेहरे दिए हैं। इनमें मौजूदा सीएम डॉ. मोहन यादव भी है।

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दरअसल, एनएसयूआई की तरफ से कोर्ट में छात्र संघ चुनाव कराने के लिए याचिका दायर की गई थी। सरकार ने कोर्ट को आश्वस्त किया है कि वह सितंबर में चुनाव कराने को तैयार है। इसके चलते उज्जैन में भी चुनाव की हलचल शुरू हो गई है। हालांकि विद्यार्थी संगठन डायरेक्ट चुनाव चाहते हैं। इनमें भाजपा समर्थित एबीवीपी भी है।

क्या है डायरेक्ट, इनडायरेक्ट और मैरिट प्रणाली

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डायरेक्ट – 1987 तक डायरेक्ट चुनाव होते थे। इसमें क्लास रिप्रेजेंटेटिव (सीआर) और छात्र संघ(अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और सहसचिव) का चुनाव डायरेक्ट होता था। यानी एक विद्यार्थी पांच वोट देता था। पहला वोट सीआर का और बाकी के चार छात्रसंघ पदाधिकारियों के होते थे।

इन डायरेक्ट- इस प्रणाली में सीआर वोटिंग से चुना जाते थे और यह चुने गए सीआर मिलकर छात्रसंघ गठित करते थे। जिसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और सहसचिव होते थे।

मैरिट प्रणाली- छात्र संघ चुनाव में विवाद की स्थिति बनने पर मेरिट प्रणाली अपनाई गई और इसके मुताबिक क्लास में सबसे ज्यादा अंक रखने वाले विद्यार्थी को सीआर बनाया जाने लगा। इस तरह चुने गए सीआर मिलकर छात्र संघ बनाने लगे। इस दौरान चार समिति खेलकूद, साहित्यक, सांस्कृतिक और एनएसएस के गठन भी किए जाने लगे। इन समितियों के अध्यक्ष-सचिव भी छात्र संघ पदाधिकारी चुनाव में वोट डालते थे।

चुनाव बंद तो अच्छे नेता पैदा होना भी कम

छात्र संघ चुनाव नेता पैदा करने की फैक्टरी होते थे। उज्जैन में छात्रसंघ चुनाव ने भाजपा और कांग्रेस को कई बड़े नेता दिए। इनमें से कुछ मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक तक बने। इनमें मौजूदा सीएम डॉ. मोहन यादव, दिवंगत मंत्री पारस जैन, डॉ. राजेंद्र जैन का नाम सबसे ऊपर है। यादव माधव साइंस कॉलेज में 1984-85 में छात्र संघ अध्यक्ष बने थे। उनसे पहले भाजपा नेता जगदीश अग्रवाल इसी कॉलेज में छात्र संघ अध्यक्ष रह चुके थे।

उज्जैन की छात्र राजनीति में माधव साइंस कॉलेज को एबीवीपी और माधव कामर्स एंड ऑटर्स कॉलेज को कांग्रेस समर्थित छात्र संगठनों (विद्यार्थी यूनियन और विद्यार्थी मोर्चा) का गढ़ माना जाता है। छात्र राजनीति से करियर शुरू करने वाले और अब कांग्रेस के युवा नेता विवेक यादव कहते हैं कि छात्र संघ चुनाव डायरेक्ट ही होना चाहिए, क्योंकि इससे ही अच्छे लीडर तैयार होते हैं। वह बताते हैं कि चुनाव लडऩा ओर लड़वाना दोनों ही एक कला है। यहीं कारण रहा कि माधव कॉलेज ने कई दिग्गज नेता तैयार किए।

इनमें डॉ. बटुकशंकर जोशी, राजेंद्र भारती, आजाद यादव, विष्णु यादव, महेश सोनी, अनंतनारायण मीणा, अरुण वर्मा, डॉ. प्रकाश चौबे, शिवा कोटवानी, महेश परमार प्रमुख हैं। इसी तरह माधव साइंस कॉलेज से लोकेश शर्मा, जगदीश अग्रवाल, डॉ. मोहन यादव, अनिल जैन कालूहेड़ा छात्र नेता के रूप में चमके। एबीवीपी ने इंदरसिंह परमार को भी राजनेता बनाया। वह संगठन मंत्री रहे। वरिष्ठ भाजपा नेता जगदीश अग्रवाल कहते हैं कि डायरेक्ट चुनाव होना अच्छी बात है। छात्र नेता विद्यार्थियों तक अपनी सीधी बात रखते हैं। इससे उनकी भाषण शैली मजबूत होती है, लोगों को साधने के कारण वह पब्लिकली ओरिएंट होते हैं। भविष्य में यह अच्छे लीडर साबित होते हैं।

छात्र संगठनों ने कमर कसी, तैयारी पर जोर

छात्र संघ चुनाव को लेकर एबीवीपी और एनएसयूआई ने कमर कस ली है। दोनों संगठन प्रमुख अपनी तैयारियों को पुख्ता बता रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि जीत का तिलक उनके ही सिर लगेगा।

हम 365 दिन मैदान में, हर दिन की तैयारी: एबीवीपी विद्यार्थियों के मुद्दों को लेकर 365 दिन मैदान में रहती है। छात्र संघ चुनाव को लेकर हमारी तैयारी पूरी है। बस यह देखना है कि चुनाव कौनसी प्रणाली से होते हैं। एबीवीपी डायरेक्ट प्रणाली से चुनाव चाहती है। ताकि युवा नेतृत्व उभरकर सामने आ सके।
सिद्धार्थ यादव, महानगर महामंत्री एबीवीपी

एनएसयूआई सीधे चुनाव चाहती है: एनएसयूआई सीधे चुनाव (डायरेक्ट ) चाहती है। सीधे चुनाव से ही युवा नेतृत्व उभर सकता है। फिलहाल सरकार ने चुनाव कराने का आश्वासन दिया है लेकिन उसने प्रणाली नहीं बताई है। अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव होने पर धांधली की आशंका ज्यादा रहेगी।
हिमांशु शुक्ल, जिलाध्यक्ष एनएसयूआई

इस साल चुनाव कराने मेें लेट हो गए हैं: चुनाव की तैयारी की दृष्टि से सरकार इस साल लेट हो गई है। छात्र संघ चुनाव एक रणनीति के तहत लड़े जाते हैं। इसमे एडमिशन का ख्याल भी रखना पड़ता है। अधिकतर शैक्षणिक संस्थानों में एडमिशन की प्रोसेस पूरी हो गई है। ऐसे में प्रवेश ले चुके विद्यार्थियों के बीच से ही किसी को चुनाव लड़वाना विद्यार्थी संगठनों की मजबूरी होगी। चुनाव लडऩे के लिए उस मुताबिक कक्षाओं में विद्यार्थियों के एडमिशन कराए जाते थे। वह समय बीत गया है। इस हिसाब से चुनाव सिर्फ औपचारिकता होंगे। फिर भी एनएसयूआई पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी।
बबलू खींची, छात्र नेता

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