महंगाई डायन : शकर का भाव 60, गुड़ का 70 रुपए पहुंचा, साबूदाना, नारियल के साथ बादाम के भाव भी चढ़े

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। रक्षाबंधन के पहले मिठास महंगी हो गई। मिठाई बनाने उपयोग की जाने वाली चीनी के भाव अब 60 रुपए किलो तक पहुंच गए हैं। गुड़ भी पीछे नहीं है, बाजार में 70रुपए के भाव बिक रहा है। साबूदाना, बादाम आदि के भाव में भी खासा उछाल है।
बाजार सूत्रों के मुताबिक 15 -20 दिनों के भीतर चीनी करीब 17 रुपए किलो और गुड़ लगभग 15 रुपए किलो तक महंगा हुआ है। जो चीनी 20 दिन पहले 44रुपए के भाव थोक बाजार में बिक रही थी, वह अब बढ़कर 56 से 57 रुपए और खेरची में 70 रुपए के भाव पर मिल रही है। इसी तरह जो गुड़ 15 दिन पहले मात्र करीब 50 रुपए किलो मिल रहा था, उसकी कीमत बढ़कर अब थोक बाजार में 58-65 और खेरची बाजार में 70 रुपए किलो तक पहुंच गई है।
राखी पर नारियल भी मिलेगा महंगा
रक्षाबंधन पर नारियल की जरूरत हर बहन को होती है। इस कारण अभी से नारियल का भाव भी बढ़कर 35 रुपए पहुंच गया है। थोक भाव में 160 नारियल की बोरी 4100 रुपए की हो गई है। इस कारण खेरची में नारियल 30 से 35 रुपए में बिक रहा है। ड्राई फ्रूट्स पर भी महंगाई की मार पड़ी है। एक महीने पहले 900 रुपए के भाव बिक रही बादाम अब 1050 से 1100 रुपए किलो बिक रही है। साबूदाने के भाव 65-66 रुपए से बढ़कर 75-80 रुपए खेरची में बिक रहे हैं।
त्योहारों पर दिखेगा साफ असर
इस बेतहाशा महंगाई का असर से घर का बजट तो बिगड़ ही रहा है लेकिन रक्षाबंधन सहित आगामी त्योहार पर भी साफ दिखेगा। आने वाले त्यौहार जन्माष्टमी, गणेश उत्सव, नवरात्रि, दशहरा और दीपावली तक लगभग सभी त्यौहार इस महंगाई से खासे प्रभावित होंगे।जानकारों का मानना है कि यदि कीमतों पर जल्द लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले त्योहारी सीजन यानी दिवाली तक हालात पूरी तरह से बेकाबू हो सकते हैं। बाजारों में इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि यदि स्थिति ऐसी ही रही तो जमाखोरी और कालाबाजारी को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे निपटने के लिए व्यापारियों ने सरकार से तत्काल सख्त कदम उठाने की अपील की है।
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
थोक कारोबारियों के अनुसार, इस साल देश में कुल 3.20 लाख टन चीनी का उत्पादन होना था, लेकिन मौसम या अन्य कारणों से केवल 2.80 लाख टन चीनी ही तैयार हो पाई। इसके अलावा विदेशों में चीनी का निर्यात (एक्सपोर्ट) भी किया गया था, जिसे बढ़ते दामों को देखते हुए फिलहाल रोक दिया गया है, फिर भी दामों में कोई कमी नहीं आ रही है। हालांकि सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 1 अगस्त से स्टॉक लिमिट भी लागू कर दी है, जिसके तहत अब थोक कारोबारी 30 दिन में केवल 4 हजार क्विंटल चीनी ही बेच सकेंगे। इसके साथ ही जानकारों का यह भी तर्क है कि चीनी के उत्पादन से एथेनॉल बनाए जाने के कारण भी बाजार में इसकी उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है।









