Advertisement

8 दिन में तीसरे ई रिक्शा चालक को चार्जिंग करते करंट लगा, मौत

प्रॉपर अर्थिंग नहीं होना हो सकती है वजह

Advertisement

शहर में पांच हजार से ज्यादा दौड़ रहे ई-रिक्शा

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। मानसूनी मौसम में ई-रिक्शा चार्ज करते वक्त एक और युवक करंट का शिकार हो गया। 8 दिनों में यह तीसरी और 24 घंटे की चार्जिंग के दौरान मौत की यह दूसरी घटना है। शहर में 5 हजार ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं और चार्जिंग के दौरान हो रहे हादसों ने इनका संचालन करने वाले के सामने चुनौती पेश कर दी है। विशेषज्ञ करंट लगने का कारण प्रॉपर अर्थिंग नहीं होने को मान रहे हैं। मानसूनी सीजन में ऐसी स्थिति बनना आम है।

Advertisement

कामदारपुरा का रहने वाला 25 साल का समीर पिता मो. रफीक ने मंगलवार शाम करीब 6 बजे घर पर ई- रिक्शा चार्ज करने के लिए जैसे ही पिन लगाई, वह करंट की चपेट में आ गया। चार्जिंग के दौरान हुए इस हादसे में वह गंभीर रूप से झुलस गया। परिजन उसे तत्काल चरक भवन अस्पताल लेकर पहुंचे, यहां परीक्षण के बाद डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजन ने बताया कि समीर का एक बालक है। वह परिवार में इकलौता कमाने वाला था। बुधवार को पीएम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

इन दो ड्राइवरों की भी जा चुकी जान

Advertisement

शहर में पिछले 8 दिन में तीन लोगों ने ई रिक्शा चार्जिंग के दौरान जान गंवाई है। 14 जुलाई को आबूखाना क्षेत्र में रहने वाले मनोहर पिता मेहरबान की करंट लगने से मृत्यु हुई थी। वह ई-रिक्शा चार्ज करते समय करंट की चपेट में आया था।

20 जुलाई को नीलगंगा थाना क्षेत्र के कवेलू कारखाना के पास रहने वाला आनंद पिता लाखन ई-रिक्शा चार्ज करते समय करंट की चपेट में आया था।

प्रॉपर अर्थिंग नहीं होना करंट लगने की वजह

8 दिन में 3 लोगों की मौत की वजह जानने के लिए अक्षरविश्व ने शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के इलेक्ट्रिकल विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रकांत शर्मा से बात की। उनके मुताबिक मानसूनी सीजन में अधिकतर हादसे प्रॉपर अर्थिंग नहीं होने के कारण होते हैं। इन मामलों में भी प्रॉपर अर्थिग नहीं होना वजह हो सकती है। शर्मा के मुताबिक मानसूनी सीजन के दौरान घरेलू उपकरणों में करंट आने की समस्या प्रॉपर अर्थिंग नहीं होने से होती है।

क्या है प्रॉपर अर्थिंग

इलेक्ट्रिल उपकरण एवं इंसान की सुरक्षा के लिए मकानों में प्रॉपर अर्थिंग जरूरी है। अमूमन लोग इसे कराने से बचते हैं। अर्थिंग होने से उपकरणों में रहने वाला अतिरिक्त करंट का असर खत्म हो जाता है और हादसा होने का खतरा नहीं रहता है। मनुष्य शरीर ऊष्मा का सुचालक है और प्रॉपर अर्थिंग न होने से करंट के संपर्क में आते ही खतरा बढ़ जाता है।

अर्थिंग के लिए 5 फीट गहरा गड्ढा खोदकर कोयला, नमक डाला जाता है। कापर प्लेट पर एल्युमिनियम का जीआई वायर लपेटा जाता है। अर्थ को अर्थ टेस्टर नामक उपकरण से मापा जा सकता है। प्रॉपटर अर्थिंग का खर्च 20 से 25 हजार रुपए तक आता है। आमतौर पर लोग इस खर्च से बचते हैं।

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें