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भूस्खलन से बनी दो झीलों से नेपाल में खतरा बरकरार

अब तक 633 की मौत : लापता लोगों का आंकड़ा 2500 हुआ, इसमें 320 भारतीय

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काठमांडू, एजेंसी। नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद खतरा अभी टला नहीं है। नेपाल-चीन सीमा के पास भूस्खलन से दो नई झीलें बन गई हैं। इनमें से एक झील से लगातार पानी रिस रहा है, जबकि दूसरी का आकार बढ़ता जा रहा है। इससे आसपास के इलाकों में दोबारा बाढ़ या भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। इसी इलाके में बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी।

15 लोकल बॉडी को आपदा प्रभावित-इमरजेंसी क्षेत्र घोषित

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तेज बहाव अपने साथ कीचड़, रेत, बजरी और बड़ी चट्टानें लेकर नीचे के इलाकों में पहुंचा था। नेपाल और तिब्बत में इस आपदा से अब तक 633 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग लापता हैं। इनमें 320 भारतीय भी शामिल हैं। वहीं, करीब 400 भारतीय अभी तिब्बत में फंसे हुए हैं। नेपाल सरकार ने बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित 5 जिलों की 15 लोकल बॉडी को आपदा प्रभावित-इमरजेंसी क्षेत्र घोषित किया है। सरकार का कहना है कि इन इलाकों में राहत और पुनर्वास कार्यों को तेज करने के लिए यह फैसला लिया गया है।

21 भारतीय लौटे सैकड़ों लापता…

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नेपाल त्रासदी से बचाए गए 21 भारतीय नागरिक शुक्रवार को दिल्ली लौट आए, जबकि 320 अब भी लापता हैं। विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी। विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल आपदा के बाद से करीब 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। वहीं, भारतीय मूल के 100 लोगों का भी अब तक पता नहीं चल सका है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल ने बताया कि नेपाल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित निकाले गए तमिलनाडु के रहने वाले 21 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। गुरुवार को काठमांडू पहुंचने के बाद भारतीय दूतावास की मदद से उन्हें इंडिगो की उड़ान से भारत लाया गया।

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