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TMC में बढ़ता जा रहा बिखराव, एक और सांसद ने छोड़ी पार्टी; ममता की चिंता बढ़ी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में राजनीतिक संकट लगातार गहराता जा रहा है। बुधवार को राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता के साथ-साथ अपना सांसद पद भी छोड़ दिया। यह तीन दिनों में टीएमसी को दूसरा बड़ा झटका है। इससे पहले 8 जून को राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर भी पार्टी और राज्यसभा सदस्यता छोड़ चुके हैं। इस बीच ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की जबकि एक दिन पहले ममता खुद सोनिया गांधी से मिल चुकी थीं।

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इस्तीफे के बाद सुष्मिता देव ने क्या कहा?

सुष्मिता देव ने पार्टी छोड़ने की वजह पूछे जाने पर कहा कि इसके पीछे कुछ व्यक्तिगत और राजनीतिक कारण हैं। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में पहुंचने का अवसर पार्टी ने दिया था इसलिए पार्टी छोड़ते समय सांसद पद छोड़ना भी उन्होंने उचित समझा। आगे और नेताओं के जाने की संभावना पर उन्होंने कहा कि किसी के फैसले की जानकारी उन्हें नहीं है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात के बारे में उन्होंने कहा कि यह केवल एक औपचारिक मुलाकात थी और कांग्रेस के समय से ही उनके साथ संबंध अच्छे रहे हैं। भाजपा में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा कुछ तय नहीं है और वे कुछ समय परिवार के साथ बिताना चाहती हैं।

टीएमसी में बगावत की पूरी टाइमलाइन

3 जून को पार्टी के भीतर पहली बड़ी टूट सामने आई। 80 में से 58 विधायकों ने पार्टी से निष्कासित ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना और विधानसभा अध्यक्ष को समर्थन पत्र सौंपा। उन्होंने ऋतब्रत को नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग की जिसे स्पीकर ने मंजूरी भी दे दी।

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8 जून को लोकसभा के 28 सांसदों में से 20 ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया। पूर्व सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बताया कि हस्ताक्षर वाला पत्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपा गया जिसमें अलग संसदीय समूह की मान्यता और अलग बैठने की व्यवस्था मांगी गई थी।

ममता बनर्जी के पास कितनी राजनीतिक ताकत बची?

आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। लोकसभा में 28 में से 20 सांसद अलग हो गए हैं और अब केवल 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा में 13 में से 2 इस्तीफा दे चुके हैं जिससे संख्या 11 रह गई है। विधानसभा में 80 में से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं और ममता के साथ केवल 22 विधायक बचे हैं।

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पार्टी को संभालने के लिए ममता और अभिषेक की कोशिशें

बुधवार को अभिषेक बनर्जी ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की जिसमें विपक्षी एकता और राजनीतिक सहयोग पर चर्चा हुई। इससे पहले मंगलवार को ममता बनर्जी ने 10 जनपथ पर सोनिया गांधी से करीब एक घंटे तक बातचीत की। 8 जून को करीब दो साल बाद आयोजित INDIA गठबंधन की बैठक में भी ममता और अभिषेक दोनों शामिल हुए थे जिसमें 25 विपक्षी दलों ने हिस्सा लिया।

टीएमसी संकट के बाद आगे क्या हो सकता है?

दोनों गुट विधानसभा, चुनाव आयोग और अदालतों में अपनी वैधता साबित करने की कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। बागी विधायकों के दो-तिहाई बहुमत के दावे पर दल-बदल कानून को लेकर बड़ा विवाद भी खड़ा हो सकता है। आने वाले समय में और नेताओं के पक्ष बदलने की संभावना बनी हुई है। ममता बनर्जी नाराज नेताओं को मनाने और संगठन में बदलाव की कोशिशें तेज करेंगी। भाजपा और कांग्रेस दोनों इस स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं। संगठनात्मक कमजोरी का असर आने वाले स्थानीय चुनावों में भी दिखाई दे सकता है। बागी खेमे के नए राजनीतिक दल के रूप में उभरने की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आने वाले दिनों में लड़ाई केवल संख्या की नहीं बल्कि टीएमसी के नाम, संगठन और राजनीतिक विरासत पर भी होगी।

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