यातायात पुलिस को ट्रेनिंग के लिए इंदौर भेजा जाए

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। देवासगेट से लेकर इंदौर गेट तक लगने वाले जाम और अतिक्रमण से पूरा शहर परेशान है। कोई किसी की सुनने को तैयार नहीं है। नगर निगम ने अतिक्रमण नहीं हटाए और पुलिस बाहर नहीं निकली। अक्षर विश्व ने पिछले अंक में समाचार प्रकाशित किया। यही समाचार अक्षर विश्व के इंस्टा पेज पर जब वीडियो सहित दिखाई दिया तो टिप्पणियों की झड़ी लग गई। समस्या से जूझ रहे लोगों ने अपने दिल की बात कुछ इस तरह कही।
महाकाल भरोसे व्यवस्था
हमारी पुलिस को बाहर की गाडिय़ों के चालान से फुर्सत मिले तो टै्रफिक पर ध्यान दे। गिनती के सिग्नल में हैं शहर में। एक भी पुलिस कर्मचारी वहां दिखाई नहीं देता। रेलवे स्टेशन के बाहर तो ई-रिक्शा वालों का राज है।
प्रवेश राय
पुलिस आखिर क्या-क्या संभाले
पुलिस की भी मजबूरी है। क्या-क्या संभाले। नेताओं को, जनता को, अधिकारियों को या कानून-व्यवस्था को। शहर बढ़ गया अमला नहीं बढ़ा। पुलिस नेताओं की सेवा में लगी रहती है।
राममोहन सिंह राठौर
सिर्फ चालान बनाते हुए दिखेंगे
उज्जैन में ट्रैफिक पुलिस वाले शहर में दिखना बंद हो गए हैं। हां, वे चालान बनाते हुए जरूर दिखेंगे। किसी कोने में खड़े बाहर की गाडिय़ों का इंतजार करते रहते हैं
जावेद खान
यदि सडक़ के दोनों ओर का अतिक्रमण हट जाए तो जाम की समस्या से मुक्ति मिल सकती है। सवाल यह है कि यह करे कौन? जिन्हें करना है वह कभी-कभी दिखावा करते हैं।
कमल पटेल
बस स्टैंड शिफ्ट करना जरूरी है: अब देवासगेट बस स्टैंड को नानाखेड़ा शिफ्ट करना जरूरी हो गया है। दिनभर लोकल और शाम को इंटरस्टेट बसों का आना जाना लगा रहता है। ऑटो, मैजिक और ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या पर रोक लगाइए।
मुक्तेश आशधीर
मेरी ट्रेन छूटते-छूटते बची
न तो ये ई-रिक्शा वाले मानते हैं और न ये मैजिक वाले। मेरी ट्रेन छूटते-छूटते बची। जाम में फंस गया था। यह सीएम का शहर है लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है।
कुंवर विवेक सिंह जादौन
डर लगने लगा है
अब चामुंडा चौराहे पर जाने में डर लगता है। चारों तरफ से वाहन आते हैं। डर लगता है कोई टक्कर न मार दे। पहले यहां पुलिस वाले रोटरी पर खड़े होते थे। व्यवस्था ठीक थी।
दीपू मसीह
क्या कर रही है हमारी पुलिस: हमारी लोकल पुलिस क्या कर रही है। क्या पुलिस सिर्फ पैसे…। पुलिस को बाहर आकर कार्रवाई करना चाहिए। जाम से निजात दिलाना होगा।
लोकेश पांचाल
आरटीओ भी जिम्मेदार
शहर में ई-रिक्शा और ऑटो की संख्या बढ़ रही है। आरटीओ की भी गलती है। नंबर क्यों दे रहे हैं। वह भी कभी-कभी जांच करने निकलते हैं।
विजय भट्ट
ट्रेनिंग के लिए इंदौर भेजा जाए
उज्जैन की यातायात पुलिस को टे्रनिंग के लिए इंदौर भेजा जाए। वहां पता चलेगा कि पुलिस वाले किस तरह बीच में खड़े होकर ट्रेफिक संभालते हैं। हर कोने में खड़े रहते हैं। लोगों को रोकते हैं। अपने यहां ऐसा नहीं होता।
नितिन बिलोने
आप इंतजार तो कीजिए फिर देखिए: थोड़े दिन रुक जाइए, फिर देखिएगा। यह ई-रिक्शा वाले आपके घर के अंदर घुस जाएंगे। किसी ने विरोध किया तो चक्काजाम कर देंगे।
लकी रायकवार
बसों का आना तो बंद करना देना चाहिए: शहर को जाम से बचाना है तो किसी भी शहर की ओर जाने वाली बसों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।
नेहा सोलंकी
यातायात पुलिस को ध्यान देना चाहिए: यदि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार लाना है तो यातायात पुलिस पहले की तरह काम करें।
असीम खान
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