उद्धव ठाकरे का तीखा वार, BJP को बताया ‘बाबर जनता पार्टी’

शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे इन दिनों मराठवाड़ा के दौरे पर हैं, जहाँ वे पार्टी छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए सांसदों के क्षेत्रों में जनसभाएं कर रहे हैं। रविवार को परभणी और धाराशिव में हुई रैलियों के दौरान उद्धव ठाकरे ने बागी सांसदों, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और केंद्र सरकार पर तीखे हमले बोले।

उद्धव ठाकरे ने कहा, “अगर देश में कानून का राज है, तो इन छह सांसदों की सदस्यता तुरंत रद्द की जानी चाहिए और उन्हें अयोग्य ठहराया जाना चाहिए। ये सांसद किसी विकास कार्य के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह अपने निजी स्वार्थ के लिए पाला बदल चुके हैं।”
राम मंदिर मुद्दे पर BJP को घेरा, बताया ‘बाबर जनता पार्टी’
धाराशिव की जनसभा में उद्धव ठाकरे ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए बीजेपी पर नया तंज कसा। उन्होंने कहा:
-
लूट का आरोप: बाबर ने राम मंदिर को तोड़ा था और अब ‘बाबर जनता पार्टी’ इस नए बने राम मंदिर को लूट रही है। दोनों में आखिर क्या फर्क रह गया है?
-
आस्था बनाम व्यापार: राम मंदिर हिंदुओं की गहरी आस्था का केंद्र है और यह एक लंबे संघर्ष के बाद बना है। पहले नारा दिया जाता था कि ‘मंदिर वहीं बनाएंगे’, लेकिन अब मंदिर के भीतर ही लूट मची हुई है। मंदिर को एक दुकान में तब्दील कर दिया गया है। बीजेपी ने हिंदुत्व की मूल विचारधारा के साथ विश्वासघात किया है।
Advertisement
‘मराठी अस्मिता और महाराष्ट्र धर्म को खत्म करने की साजिश’
उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि शिवसेना को तोड़ना सिर्फ एक राजनीतिक बगावत नहीं है, बल्कि इसके पीछे महाराष्ट्र की पहचान को मिटाने का एक बड़ा खेल चल रहा है।
उन्होंने जनता से कहा, “अगर उनके (महायुति) पास पहले से ही पूर्ण बहुमत था, तो फिर मेरे सांसदों को तोड़ने की क्या जरूरत आन पड़ी? वे असल में महाराष्ट्र, शिवसेना और ‘महाराष्ट्र धर्म’ को पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं। वे मराठी अस्मिता और छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वाभिमान को चोट पहुँचाकर सब कुछ गुजरात ले जाना चाहते हैं।”
सांसदों के दल-बदल को बताया ‘ऑपरेशन देवेंद्र’
परभणी की रैली में उद्धव ठाकरे ने इस पूरे दलबदल को ‘ऑपरेशन देवेंद्र’ का नाम दिया और दावा किया कि इसके पीछे बीजेपी की आंतरिक गुटबाजी और राजनीति काम कर रही है।
-
नेताओं के पर कतरना: बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व अपने ही कद्दावर नेताओं को आगे बढ़ने से रोकता है। शिवराज सिंह चौहान, नितिन गडकरी और देवेंद्र फडणवीस इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।
-
प्रधानमंत्री पद की रेस: नितिन गडकरी के पर इसलिए काटे गए ताकि वे भविष्य में प्रधानमंत्री पद के दावेदार न बन सकें। अगर वे दूसरी बार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते, तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के समर्थन से पीएम बन सकते थे।
-
फडणवीस को रोकने का खेल: शिवसेना को इस तरह तोड़ने के पीछे देवेंद्र फडणवीस को रोकने की राजनीति भी शामिल है। फडणवीस दिल्ली जाने का सपना देख रहे हैं और यदि ऐसा होता है, तो यह महाराष्ट्र के लिए एक और बड़ा झटका साबित होगा।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में 22 जून को उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को उस समय बड़ा झटका लगा था जब उनके लोकसभा के 9 सांसदों में से 6 सांसद एक साथ पार्टी छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए थे। इस बड़े उलटफेर के बाद अब लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई है, जबकि उद्धव गुट के पास केवल 3 सांसद बचे हैं। इसी टूट के बाद उद्धव ठाकरे अब बागी सांसदों के खिलाफ जनता के बीच जाकर मोर्चा संभाल रहे हैं।









