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यूआईएमआर गठन विवाद : हाईकोर्ट ने नोटिस देकर मांगा सरकार से जवाब

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। छह जिलों को लेकर बनाए जा रहे यूआईएमआर (उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन) के गठन का मसला हाईकोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है। गठन पर उठे कानूनी विवाद को सुलझाने के लिए हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सरकार को नोटिस जारी किया है। चार सप्ताह में सरकार को जवाब देना है।

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दरअसल, उज्जैन, इंदौर, देवास, धार, शाजापुर और रतलाम जिले को मिलाकर यूआईएमआर बनाया जा रहा है। सरकार की मंशा इसके पीछे मालवा रीजन के इन छह प्रमुख जिलों का विकास एक जैसी रफ्तार से करने की है। यूआईएमआर की गठन की प्रक्रिया पर आपत्ति लेते हुए इंदौर खंडपीठ की डबल बेंच के सामने मामला पहुंचा है।

जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी के सामने यह मसला अधिवक्ता अक्षत पहाडिय़ा ने रखा है। उनका कहना है कि यूआईएमआर घोषित करने में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। पहले अधिसूचना जारी होनी थी और उसके बाद गठन होना था। सरकार ने 28 जनवरी 2026को यूआईएमआर घोषित किया और पांच महीने बाद 12 जून को अधिसूचना जारी की।

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यह भी आपत्ति

यूआईएमआर में चार नगरनिगम (उज्जैन, इंदौर, रतलाम और देवास), नगरपालिका और नगर पंचायत क्षेत्र आएंगे। मेट्रोपॉलिटन रीजन बनने से इन संस्थाओं के अधिकार खत्म/सीमित हो जाएंगे।

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यूआईएमआर गठन से पहले इन निकायों से राय ली जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

यह गठन 74 वें संविधान संशोधन और अनुच्छेद 14 के विपरीत है।

 बेंच ने सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

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