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सुरक्षा दरकिनार, दिल्ली पार्ट-2 का इंतजार

पेंचीदा फायर एक्ट का फायदा उठा रहे संचालक, सुरक्षा भगवान भरोसे

 

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अक्षरविश्व न्यूज :उज्जैन। दिल्ली के एक होटल में भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। शहर में सैकड़ों होटल/गेस्ट हाउस और 400 से ज्यादा रेस्टोरेंट संचालित हो रहे हैं जो कि सुरक्षा मानकों पर अनफिट हैं और कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं।

प्रदेश में कड़ा फायर एक्ट लागू नहीं है। 50 बेड से कम क्षमता वाले होटलों को फायर एनओसी लेने की वैधानिक बाध्यता नहीं है। नतीजा, छोटे होटल और रेस्टोरेंट संचालक नियमों को ताक पर रखकर मनमर्जी से कारोबार चला रहे हैं और आम जनता की जान जोखिम में डाल रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक मप्र में अभी तक स्वतंत्र फायर एक्ट लागू नहीं है। इस वजह से नियमों का उल्लंघन करने वाले होटल संचालकों पर न तो भारी-भरकम जुर्माना लगाया जा सकता है और न ही उन पर कोई सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। निगम केवल नोटिस जारी करने तक सीमित है जिसका फायदा रसूखदार होटल मालिक उठा रहे हैं।

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गलियों में चल रहे सैकड़ों होटल-रेस्टोरेंट

शहर के अधिकतर होटल/गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट गलियों में चल रहे हैं। महाकाल मंदिर के पीछे २४ खंभा मंदिर घाटी, कहारवाड़ी, कसेरा बाखल, महाकाल घाटी सहित दर्जनों ऐसे इलाके हैं जहां हर घर में गेस्ट हाउस चल रहे हैं। अगर ऐसे क्षेत्र संकरे क्षेत्र में आग लग जाए तो फायर ब्रिगेड को अंदर जाने में ही काफी मशक्कत करना पड़ेगी।

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सडक़ और बेसमेंट में लगी भट्टियां

महाकाल मंदिर क्षेत्र में कई रेस्टोरेंट ऐसे हैं जो या तो होटल की बेसमेंट में चल रहे हैं या फिर सडक़ पर भट्टियां लगा रखी हैं। इन होटलों और रेस्टोरेंट में रोजाना सैकड़ों लोगों की आवाजाही होती है, वहां कमर्शियल गैस सिलेंडर, किचन उपकरण और बिजली का भारी लोड रहता है। इसके बावजूद यहां आग से बचाव के लिए पर्याप्त सुरक्षा साधन नहीं है। प्रशासनिक अफसरों को दिखाने के लिए यहां अग्निशमन यंत्र जरूर हैं लेकिन अधिकतर को इनका उपयोग भी नहीं आता। मास्टर प्लान और भवन अनुज्ञा के नियमों के अनुसार बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग या स्टोरेज (सामान रखने) के लिए ही किया जा सकता है।

फायर एनओसी किसके लिए अनिवार्य?

इन श्रेणियों में आने वाले होटलों के लिए फायर एनओसी लेना जरूरी है- 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतें। 500 वर्गमीटर से बड़े भूखंड (प्लॉट) पर बने होटल और 50 से अधिक कमरों वाले होटल या अस्पताल।

एनओसी के लिए पात्र होटल/अस्पताल मेें फायर स्प्रिंकलर, स्मोक डिटेक्टर, इमरजेंसी एग्जिट गेट आदि साधन होना चाहिए।

छोटे होटल/गेस्ट हाउस या लॉज के लिए नगर निगम से अधिकृत सेफ्टी इंजीनियर की रिपोर्ट जरूरी है। यहां भी इमरजेंसी एग्जिट, अग्निशामक यंत्र आदि होना जरूरी है।

होटलों का सर्वे करा रहे

शहर की सभी छोटी-बड़ी होटलों के सर्वे का काम शुरू कर दिया है। यहां फायर सेफ्टी के इंतजामों को जांचा जाएगा। संकरी गलियों में आग बुझाने के लिए नगर निगम के पास छोटी साइज के फाइटर (बोलेरो और ४०७ वाहन) हैं। ये आसानी से अंदर जा सकते हैं। इन्हें बड़े फाइटर और टैंकर से कनेक्ट कर आग पर काबू पाया जा सकता है।-एलपी साहू, फायर ब्रिगेड अधिकारी

400 से अधिक रेस्टोरेंट
शहर में ४०० से अधिक भोजनालय/ रेस्टोरेंट संचालित हैं। हम लोग भोजन क्वालिटी चैक करने के लिए समय-समय पर कार्रवाई करते हैं।-बसंतदत्त शर्मा जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी

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