स्केटिंग-साइकिल से भारत भ्रमण पर निकली यूपी के कन्हैया सूर्या की जोड़़ी

20 माह में पूरा करेंगे 15 हजार किमी का सफर

राजस्थान से होते हुए आज सुबह उज्जैन पहुंचे
उज्जैन। कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालों यारों… दुष्यंत कुमार इन पंक्तियों को अपनी प्रेरणा बनाते हुए यूपी के दो दोस्तों की जोड़ी भारत भ्रमण पर निकली है। एक स्केटिंग कर रहा है तो दूसरे ने साइकिल का हैंडल थामा। 28 दिनों में करीब 1700 किमी का सफर कर राजस्थान से होते हुए दोनों सुबह उज्जैन पहुंचे। यहां पर वे बाबा महाकाल के दर्शन करेंगे और फिर अपनी अगली मंजिल के लिए रवाना होंगे।
यूपी के बहराइच जिले के ग्राम राजापुर कतरनिया का कन्हैया निषाद और अपने दोस्त सिद्धार्थ जिले ग्राम पेडरा का रहने वाला सूर्या भारती के साथ इस सफर पर निकला है। दोनों की उम्र है 19 साल और सपना है देश का भ्रमण। सुबह उज्जैन पहुंचने पर कन्हैया और सूर्या से अक्षरविश्व रिपोर्टर ने बातचीत की। 29 अक्टूबर को घरवालों की मर्जी और आशीर्वाद लेकर उन्होंने यात्रा की शुरुआत की थी।
यूपी से होते हुए वह राजस्थान में दाखिल हुए और विभिन्न मंदिरों के दर्शन करते हुए खाटू श्याम पहुंचे। इसके बाद सफर को आगे बढ़ाते हुए मप्र में प्रवेश करते हुए बुधवार सुबह उज्जैन पहुंचे। चेहरे पर सफर की थकान नहीं बल्कि मुस्कान खिल रही थी। कन्हैया ने आठवीं तक शिक्षा ली है और पेश से पोकलेन ड्राइवर है, जबकि सूर्या ने 12वीं पास की है और उसका फास्ट फूड का स्टार्टअप है। दोनों इससे पहले मां वैष्णोदेवी की यात्रा भी इसी तरह से पूरी कर चुके हैं। इसके बाद से उनके मन में देश को देखने की चाह ने जन्म लिया लेकिन संसाधन सीमित थे लेकिन आर्थिक बाधा भी आड़े आई लेकिन उन्होंने सभी को हराते हुए इस सफर को शुरू किया। स्केटिंग में मास्टर होने के कारण उसने स्केट को अपना साथी बनाया तो सूर्या ने साइकिल का हैंडल थामा और निकल पड़े इस अद्भुत सफर पर।
एक दिन में तय करते हैं 70 किलोमीटर की दूरी
कन्हैया और सूर्या बताते हैं कि रोज 6 बजे उनके सफर की शुरुआत होती है और एक दिन में 70 किमी का सफर तय करते हैं। शाम को किसी मंदिर, धर्मशाला या आश्रम में रुकते हैं। यदि कभी जगह नहीं मिलती को रातभर भी चलना पड़ता है। हालांकि, ऐसा कम ही हुआ है।
बैग में रहते हैं खाने का सामान: कन्हैया और सूर्या अपने साथ दो बैग लेकर चलते हैं, उसमें खाना बनाने का सामान रखा है। जहां भी रात में रुकते हैं दोनों खाना भी खुद ही बनाते हैं। उन्होंने बताया कि सामान खत्म होता है तो दुकान से खरीदते हैं और कई लोगों से ऐसे भी मिले जो मदद कर देते हैं, इसी तरह आगे बढ़ते जा रहे हैं। दोनों ने बताया कि 29 अक्टूबर से शुरू हुई उनकी यह यात्रा कन्याकुमारी में जाकर समाप्त होगी। इस दौरान करीब 15 हजार किमी की दूरी तय करने में दोनों को 20 माह का समय लगेगा।









