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विक्रमोत्सव: पहली बार शिव बारात के रूप में कलश यात्रा

सम्राट विक्रमादित्य के नौ रत्न दिखाई देंगे, वाहनों का रहेगा बड़ा काफिला

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अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। विक्रमोत्सव का आरंभ महाकाल नगरी उज्जैन में कलश यात्रा के साथ होगा। खास बात यह कि पहली बार यह शिव बारात के रूप में निकाली जाएगी, जिसमें शिव भक्ति पर केंद्रित आकर्षक झाकियां दिखाई देंगी। सम्राट विक्रमादित्य के दरबार के नौ रत्न भी झांकियों में दिखाई देंगे। कलश यात्रा में वाहनों का बड़ा काफिला दिखाई देगा।

उज्जैन सहित पूरे प्रदेश और दिल्ली में 125 दिनों तक आयोजित होने वाले विक्रमोत्सव का शुभारंभ 26 फरवरी को महाशिवरात्रि से होगा। पहले दिन कलश यात्रा निकाली जाएगी जो क्षीरसागर से आरंभ होगी। गर्ल्स डिग्री कॉलेज की छात्राएं बड़ी संख्या में शामिल होंगी और राष्ट्रीय सुरक्षा योजना के छात्र भी इसमें विभिन्न वेशभूषा में दिखाई देंगे। क्षीरसागर का जल कलश में भरकर यात्रा निकाली जाएगी। यह देवासगेट, मालीपुरा और चामुंडा माता मंदिर होते हुए कोठी रोड स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर पहुंचेगी। इस दौरान यात्रा में भगवान शिव की बारात और सम्राट विक्रमादित्य के समय का दृश्य धरती पर उतरता दिखाई देगा। भगवान शिव के गणों के रूप में सजे धजे लोग आकर्षण का केंद्र होंगे तो विक्रमादित्य के नौ रत्न भी दिखाई देंगे।

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सीएम डॉ. मोहन यादव ने आरंभ किया था उत्सव
विक्रमोत्सव किसी समय में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुरू किया था। आज यह विश्व के सबसे लंबी अवधि के आयोजन के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। इस बार यह 125 दिनों तक चलेगा। विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया प्रदेश के सभी शिव मंदिरों को इस आयोजन से जोड़ा जा रहा है। राजधानी दिल्ली में भी कई कार्यक्रम होंगे। नाटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से यह उत्सव देश का अदभुत आयोजन होगा।

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