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चरक में लिफ्ट को ‘इलाज’ की जरूरत, 3 चालू, बाकी बंद

मरीज और उनके परिजनों को सीढिय़ों से आना-जाना पड़ रहा

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सिंहस्थ 2016 के समय 93 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया छह मंजिला चरक अस्पताल कहने को संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल है लेकिन मूलभूत सुविधाओं की बात करें तो यहां अधिकांश समय समस्याओं का अंबार लगा होता है। वर्तमान में यहां लिफ्ट सबसे बड़ी समस्या है जो मरीज और उनके परिजनों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है जिसे खुद ही ‘इलाज’ की जरूरत है।

सूत्रों के मुताबिक चरक अस्पताल में 10 में से 7 लिफ्ट खराब है। जो तीन चालू हैं उनकी स्थिति भी खस्ता है। आए दिन लिफ्ट को लेकर शिकायतें आती हैं। लाखों खर्च कर लगाई गई लिफ्ट आवाज कर रही हैं, सेंसर खराब है, कभी भी चलते-चलते रुक जाती है। ऐसे में बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं एवं गंभीर रोगी सबसे ज्यादा परेशान होते हैं। अब सवाल यह उठता है कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी इतनी लापरवाही क्यों?

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बार-बार खराब होती रही लिफ्ट
चरक भवन 2016 में बना तब से वर्ष 2021 तक इंट्रीग्रेटेड कंट्रोल कंपनी ने लिफ्ट के ठेके और मेंटेनेंस का काम संभाला। इसके बाद ठेका श्रीजी इंटरप्राइज को मिला जिसने फरवरी 2025 तक काम किया। इस बीच कई बार लिफ्ट खराब होती रही लेकिन मेंटेनेंस नाममात्र हुआ। जिसके चलते उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया गया। फरवरी में ही 10 में से 8 लिफ्ट खराब हो गई तब फिर से इंट्रीगे्रटेड कंपनी को ठेका दिया गया।

क्या कहते हैं मरीज और परिजन

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बच्चे को तीन दिन से अस्पताल की दूसरी मंजिल पर भर्ती किया है। लिफ्ट की हालत खस्ता होने के कारण दिनभर में सीढिय़ों से ही आना जाना पड़ रहा है। इससे काफी परेशानी हो रही है।
संदीप सोनी पिपलावदी

मेरी पत्नी को डिलेवरी के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया है लेकिन यहां लिफ्ट की हालत बेहद खराब है। सभी लिफ्ट या तो खराब है या फिर बंद है, जो जैसे-तैसे चल रही है उसमें काफी भीड़ है। इससे काफी दिक्कत हो रही है।
देवेंद्र सिंह महिदपुर

मेरी मां गंगाबाई की आंख का ऑपरेशन हुआ है। उनकी उम्र को देखते हुए पिछले दो दिनों से इलाज के लिए पांचवीं मंजिल पर डरते-डरते लिफ्ट में ले जाना पड़ रहा है क्योंकि लिफ्ट कभी भी चलते-चलते बंद हो जाती है।
कमल सिंह रेवाड़ी खजूरिया

अभी कलेक्ट्रेट में मीटिंग में हूं…
इस संबंध में जब सिविल सर्जन डॉ. संगीता पलसानिया से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कलेक्ट्रेट में मीटिंग में होने की बात कहते हुए बाद में चर्चा करने की बात कही। इसके बाद सीएमएचओ डॉ. अशोक पटेल से चर्चा करना चाही तो उनसे भी बात नहीं हो सकी।

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