मानसून तेलंगाना में अटका, MP और महाराष्ट्र में हफ्तेभर इंतजार

देश के कई हिस्सों में मानसून की रफ़्तार सुस्त पड़ने से आम लोगों को उमस और गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। मानसून पिछले करीब छह दिनों से तेलंगाना के भद्राचलम इलाके में आकर ठिठक गया है। इस रुकावट के चलते छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे मध्य भारत के राज्यों में बारिश की एंट्री का समय आगे खिसक गया है, जिससे कई शहरों में एक बार फिर लू जैसे हालात बन गए हैं। मौसम विज्ञान संगठन के हाइड्रोमेट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस अड़चन की वजह से छत्तीसगढ़ में मानसून आने में अभी 3 से 4 दिन और मध्य प्रदेश में करीब एक हफ्ते तक की देरी हो सकती है।

राहत की बात यह है कि इस हफ्ते के खत्म होने तक देश में मानसूनी गतिविधियों में दोबारा तेजी आने की उम्मीद जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि इस बार मानसून के कमजोर पड़ने की असली वजह समुद्र में पानी या नमी की कमी नहीं है, बल्कि हमारे ऊपरी वायुमंडल में बहने वाली हवाओं का एक अजीब और असामान्य पैटर्न है। इन बेहद तेज रफ़्तार हवाओं को विज्ञान की भाषा में ‘जेट स्ट्रीम’ कहा जाता है। ये ताकतवर हवाएं इस साल अपनी तय जगह से काफी ज्यादा दक्षिण की तरफ खिसक गई हैं, जिसकी वजह से नीचे चल रही मानसूनी हवाओं की गति पूरी तरह से थम गई है।
अरब सागर से उठने वाली हवाओं में भी नहीं दिख रहा दम
तेलंगाना के साथ-साथ अरब सागर की तरफ से आगे बढ़ने वाली मानसूनी हवाएं भी पिछले 8 जून से एक ही जगह पर थमी हुई हैं। इस बड़े गतिरोध के कारण देश के अंदरूनी इलाकों में पहले से दाखिल हो चुकी मानसूनी हवाओं को आगे बढ़ने के लिए जरूरी धक्का या ‘पुश’ नहीं मिल पा रहा है। सीधे शब्दों में कहें तो, मानसूनी हवाओं को तेलंगाना की सीमा से आगे धकेलकर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के मैदानी इलाकों की तरफ ले जाने के लिए वायुमंडल में जो जरूरी दबाव या प्रेशर बनना चाहिए, वह फिलहाल गायब है।
सैटेलाइट तस्वीरों से गायब हुए मेघ, बारिश में भारी गिरावट
बीते 15 जून को अंतरिक्ष से ली गई सैटेलाइट तस्वीरों ने मौसम वैज्ञानिकों को चिंता में डाल दिया है, क्योंकि देश के एक बहुत बड़े भूभाग के ऊपर से मानसूनी बादल पूरी तरह से नदारद नजर आए। इसके ठीक एक दिन पहले, यानी 14 जून तक भारत का एक बड़ा हिस्सा घने बादलों की चादर से ढका हुआ था। मौसम विभाग की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 4 जून से 15 जून के बीच पूरे देश में जहां औसतन 53.7 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, वहीं इस बार महज 19.2 मिलीमीटर पानी ही बरसा है। यह सामान्य के मुकाबले बारिश में करीब 64% की एक बहुत बड़ी कमी को दर्शाता है।
आसमान से बरस रही आग, सात राज्यों में पारा रिकॉर्ड स्तर पर
बारिश के इस लंबे इंतजार के बीच देश के कम से कम 7 बड़े राज्यों में भीषण गर्मी का प्रकोप देखा जा रहा है। राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई प्रमुख शहरों में सोमवार को तापमान का कांटा 40 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर गया। इस दौरान पूरे देश में सबसे ज्यादा गर्मी उत्तर प्रदेश के बांदा में रिकॉर्ड की गई, जहां पारा 43.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
इसके अलावा मध्य प्रदेश के खजुराहो में तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस, छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में 42 डिग्री सेल्सियस, ओडिशा के बौध में 42.5 डिग्री सेल्सियस, महाराष्ट्र के वर्धा में 41.5 डिग्री सेल्सियस, बिहार के शेखपुरा में 41.5 डिग्री सेल्सियस और राजस्थान के फलोदी में 42.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने लोगों को बेहाल कर दिया।
आने वाले दो दिनों के मौसम का पूरा पूर्वानुमान
17 जून की स्थिति:
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बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश की उम्मीद है। बिहार के कुछ जिलों में 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से धूलभरी आंधी और तेज हवाएं चलने का अलर्ट है।
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असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश के साथ-साथ दक्षिण के तमिलनाडु, पुडुचेरी और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में मूसलाधार बारिश होने की आशंका जताई गई है।
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राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ मानसूनी बौछारें पड़ सकती हैं, जहां हवाओं की रफ़्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है।
18 जून की स्थिति:
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सिक्किम, उत्तरी बंगाल, असम और मेघालय के पहाड़ी और तराई वाले इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है।
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राजस्थान और मध्य प्रदेश के आसमान में बादलों की आवाजाही के साथ 40-60 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से अंधड़ चलने और पानी गिरने के आसार हैं।
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झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में बिजली कड़कने के साथ तेज बौछारें पड़ने की संभावना बनी रहेगी।
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दक्षिण भारत के तमिलनाडु, पुडुचेरी, कर्नाटक और महाराष्ट्र के तटीय हिस्सों में बारिश का दौर लगातार जारी रह सकता है।
जेट स्ट्रीम का रुख बदलते ही झमाझम बरसेंगे बादल
मौसम विभाग के फॉरकास्ट के मुताबिक, वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में बना यह जेट स्ट्रीम का चक्रवात जैसे ही थोड़ा सुस्त पड़ेगा, वैसे ही नीचे की मानसूनी हवाएं एक बार फिर से एक्टिव हो जाएंगी। अनुमान है कि अगले 4 से 5 दिनों के भीतर परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हो जाएंगी और मानसून तेजी से आगे बढ़ते हुए महाराष्ट्र, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ के बाकी बचे हिस्सों को अपने आगोश में ले लेगा।
तकनीकी तौर पर समझें तो जेट स्ट्रीम हमारे वायुमंडल की सबसे ऊपरी परतों में बेहद तेज गति से बहने वाली हवाओं की एक संकरी पट्टी होती है। ये हवाएं आमतौर पर जमीन की सतह से करीब 8 से 15 किलोमीटर की भारी ऊंचाई पर चलती हैं। ऊंचाई पर होने के बावजूद ये नीचे बनने वाले मानसूनी बादलों और उत्तर भारत में आने वाले वेस्टर्न डिस्टर्बेंस यानी पश्चिमी विक्षोभ के पूरे रूट और रफ़्तार को तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती हैं।









