सनी देओल-अक्षय खन्ना की फिल्म ‘इक्का’ का रिव्यू और कहानी

सनी देओल और अक्षय खन्ना की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘इक्का’ हाल ही में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है। 65 वर्ष की उम्र में इस फिल्म के जरिए सनी देओल ने ओटीटी (OTT) की दुनिया में कदम रखा है। सिद्धार्थ पी मल्होत्रा द्वारा निर्देशित इस फिल्म में दीया मिर्जा और तिलोत्तमा शोम भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।
कहानी (Plot)
फिल्म की कहानी दो समानांतर घटनाओं के इर्द-गिर्द घूमती है। एक तरफ सनी देओल की बेटी एक गंभीर बीमारी से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ अक्षय खन्ना के साथ एक दुर्घटना का कनेक्शन है। सनी देओल फिल्म में एक ऐसे वकील ‘इक्का’ के किरदार में हैं, जो कभी केस नहीं हारते। एक मजबूरी के चलते उन्हें अक्षय खन्ना का केस लड़ना पड़ता है। फिल्म का मुख्य संघर्ष इसी मजबूरी और न्याय के बीच की जद्दोजहद है।
अभिनय और निर्देशन
- सनी देओल: ‘ढाई किलो के हाथ’ वाले सनी पाजी को एक शांत वकील के रूप में देखना प्रशंसकों के लिए थोड़ा मायूस करने वाला हो सकता है। फिल्म में उनकी चिर-परिचित ऊर्जा और आक्रामकता की कमी महसूस होती है।
- अक्षय खन्ना: लंबे अंतराल के बाद लौटे अक्षय खन्ना का काम अच्छा है, लेकिन वह उस स्तर का प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे हैं, जिसकी उनसे उम्मीद की जाती है।
- अन्य कलाकार: दीया मिर्जा और तिलोत्तमा शोम का काम ‘ठीक-ठाक’ है।
इक्का फिल्म का विश्लेषण
फिल्म की शुरुआत हिट एंड रन केस वाले सीन से होती है, जो दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान जरूर लाता है। कोर्ट रूम के दृश्य प्रभावी हैं, लेकिन कोर्ट से बाहर की कहानी काफी कमजोर और बिखरी हुई लगती है। फिल्म में कोर्टरूम ड्रामा वाली ‘ऊर्जा’ और ‘पेस’ (गति) की कमी है, जिससे कहानी में कसावट का अभाव दिखता है।
वर्डिक्ट: अगर आप सनी देओल की ‘दामिनी’ जैसी एनर्जी की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म आपको निराश कर सकती है। यदि आपको सामान्य कोर्टरूम ड्रामा पसंद है, तो आप इसे फुर्सत में देख सकते हैं।
रेटिंग: 2/5









