सोना-चांदी में बड़ी गिरावट! 8 दिन में चांदी ₹22 हजार टूटी, सोना भी ₹3,470 हुआ सस्ता

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब सर्राफा बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। 8 जून को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों के बीच बढ़ती अनिश्चितता के चलते कीमती धातुओं की बिकवाली बढ़ गई है, जिससे दोनों धातुओं के दाम नीचे आ गए हैं।
सोने की कीमत में 3,470 रुपये की गिरावट
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत में आज 3,470 रुपये की कमी आई है। इसके बाद 10 ग्राम सोने का भाव घटकर 1.51 लाख रुपये पर पहुंच गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव के माहौल में निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं और जोखिम वाले निवेश से दूरी बना रहे हैं।
चांदी भी हुई सस्ती, एक किलो पर 15,748 रुपये की कमी
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट देखने को मिली है। एक किलो चांदी का भाव 15,748 रुपये घटकर 2.41 लाख रुपये पर आ गया है।
गौरतलब है कि 31 मई को चांदी की कीमत 2.63 लाख रुपये से अधिक थी। ऐसे में कुछ ही दिनों के भीतर चांदी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
रिकॉर्ड ऊंचाई से काफी नीचे पहुंचे दाम
इस वर्ष की शुरुआत में सोना और चांदी दोनों ने नए शिखर छुए थे। 31 दिसंबर 2025 को सोने की कीमत करीब 1.33 लाख रुपये थी, जो 29 जनवरी 2026 को बढ़कर 1.76 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। इसके बाद से अब तक सोना करीब 25 हजार रुपये सस्ता हो चुका है।
वहीं चांदी ने भी जनवरी में नया इतिहास रचा था। 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपये प्रति किलो की कीमत वाली चांदी 29 जनवरी 2026 को बढ़कर 3.86 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। अब यह अपने सर्वोच्च स्तर से करीब 1.45 लाख रुपये नीचे आ चुकी है।
सिर्फ आठ दिनों में 22 हजार रुपये टूटी चांदी
जून महीने की शुरुआत से ही चांदी में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है। महीने के पहले आठ दिनों में ही चांदी करीब 22 हजार रुपये प्रति किलो सस्ती हो चुकी है। इससे निवेशकों और कारोबारियों के बीच चिंता बढ़ गई है।
आखिर क्यों गिर रहे हैं सोना-चांदी के दाम?
आमतौर पर युद्ध या वैश्विक संकट के समय सोना और चांदी सुरक्षित निवेश माने जाते हैं और उनकी मांग बढ़ जाती है। लेकिन इस बार बाजार का रुख अलग दिखाई दे रहा है।
नकदी को प्राथमिकता दे रहे निवेशक
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण निवेशक अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए कीमती धातुओं की बजाय नकदी जमा करना अधिक बेहतर समझ रहे हैं। यही वजह है कि सोना और चांदी बेचकर लोग नकदी जुटा रहे हैं।
मुनाफावसूली का भी दिख रहा असर
जनवरी में सोना और चांदी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए थे। इसके बाद बड़े निवेशकों ने ऊंचे दामों पर अपनी हिस्सेदारी बेचकर मुनाफा कमाना शुरू कर दिया। बाजार में आपूर्ति बढ़ने से कीमतों पर दबाव बना और दोनों धातुओं के दाम लगातार नीचे आते गए।
आगे क्या रह सकती है बाजार की दिशा?
विशेषज्ञों के अनुसार जब तक वैश्विक हालात सामान्य नहीं होते और निवेशकों का भरोसा मजबूत नहीं होता, तब तक सर्राफा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट खरीदारी का अवसर भी साबित हो सकती है।









