इंदौर गेट ब्रिज प्रभावितों ने की सीएम से मुलाकात

सीएम ने कहा-मुआवजा, वैकल्पिक स्थान या सड़क की चौड़ाई कम करने पर होगा विचार

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। अपनी दुकानों और मकानों को टूटने से बचाने के लिए इंदिरा नगर चौराहे से हरिफाटक तक के व्यापारी और रहवासी सोमवार सुबह 7 बजे ही मुख्यमंत्री आवास पहुंच गए और मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इन्होंने प्रशासन द्वारा मकानों व दुकानों पर तोडऩे के लिए खींची गई लाल लकीरों से चिंतित इन लोगों ने अपनी व्यथा सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखी।
व्यापारियों की गुहार सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पूरी योजना पर पुनर्विचार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि यदि योजना आगे बढ़ती है, तो प्रभावितों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से चर्चा में यह भी कहा कि कुछ ऐसी सरकारी जमीन देखी जाए और प्रभावितों को वहां दुकान दी जाए। इसके अलावा, प्रशासन इस बात पर भी विचार करेगा कि निर्माण के दायरे को सीमित करते हुए रोड की चौड़ाई घटाई जाए, ताकि व्यापारियों का कम से कम नुकसान हो।
रेलवे-बस स्टैंड की जमीन का दिया विकल्प
व्यापारियों का कहना है कि पूर्व में भी तकनीकी कारणों का हवाला देकर कार्रवाई की जाती रही है, इसलिए उन्हें महज आश्वासन नहीं बल्कि लिखित में ठोस गारंटी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि जब रेलवे और बस स्टैंड की सरकारी जमीन शहर में उपलब्ध है, तो रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों को क्यों तोड़ा जा रहा है। प्रशासन के इस प्रोजेक्ट से शहर के करीब 3000 परिवारों का रोजगार और आशियाना प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे आंदोलन को विवश होंगे। फिलहाल, सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से अजीत मंगलम, बंटू यादव, सुनील जैन, सफू भाई, जाहिद अली बंदूक वाला, श्याम यादव, हेमंत जैन आदि
शामिल थे।









