बिना ओटीपी और मैसेज गायब हो रहे एकाउंट से रुपए, एपीके फाइल से 1 लाख से ज्यादा की ठगी

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक ऐसा खतरनाक और नया तरीका ढूंढ निकाला है, जिसने पुलिस और आम जनता दोनों की नींद उड़ा दी है। इस नए स्कैम में न तो पीडि़त के मोबाइल पर कोई ओटीपी आता है और न ही पैसे कटने का कोई मैसेज दिखाई देता है। ठग सिर्फ एपीके (एंड्रॉयड एप्लिकेशन पैकेज) फाइल के जरिए आपके पूरे फोन का कंट्रोल अपने हाथ में ले रहे हैं। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला उज्जैन के संतनगर से सामने आया है, जहां रहने वाले 50 वर्षीय रूपकिशोर गुप्ता इस नए फ्रॉड का शिकार हो गए।
पीडि़त रूपकिशोर गुप्ता के मुताबिक, 24 मई को उनके पास क्रेडिट कार्ड से जुड़ा एक मैसेज आया। जो दरअसल एपीके फाइल थी। उसे लोड करने के बाद उनके खाते से 1 लाख 3 हजार रुपए ट्रांसफर हो गए। हैरान करने वाली बात यह रही कि इतनी बड़ी रकम निकलने के बाद भी पीडि़त को न तो बैंक की तरफ से कोई अलर्ट मिला और न ही कोई ओटीपी आया। जब उन्होंने अपना अकाउंट चेक किया, तब उन्हें इस ठगी का पता चला।
माधवनगर पुलिस और साइबर सेल के पास पिछले कुछ दिनों में ऐसे कई मामले आए हैं। पीडि़तों का एक ही कहना है उन्होंने किसी के साथ अपना ओटीपी शेयर नहीं किया। इसके बावजूद उनके खातों से पैसे गायब हो गए। पुलिस जांच में यह बात साफ हुई है कि इन सभी मामलों में पीडि़तों के मोबाइल में पहले से ही एक संदिग्ध एपीके फाइल डाउनलोड थी। इसी फाइल ने फोन की सुरक्षा को पूरी तरह से हैक कर लिया था, जिसके कारण पैसे कटने के बाद भी मोबाइल पर कोई अलर्ट या मैसेज नहीं आ पाया।
साइबर पुलिस की सलाह:-अज्ञात सोर्स से डाउनलोड न करें: वॉट्सऐप, टेलीग्राम या किसी अनजान लिंक से आई एपीके फाइल को कभी भी डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। हमेशा गूगल प्ले स्टोर का ही इस्तेमाल करें। किसी भी नए ऐप को इंस्टॉल करते समय उसे मैसेज, कॉल लॉग या गैलरी की अनुमति देने से पहले सोचें कि क्या उस ऐप को वाकई इसकी जरूरत है।
क्या है एपीके फाइल और कैसे होती है ठगी?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, एपीके वह फाइल फॉर्मेट है जिसका उपयोग एंड्रॉयड फोन में ऐप्स को इंस्टॉल करने के लिए किया जाता है। ठग इसका इस्तेमाल हथियार के रूप में कर रहे हैं। ठग इस खतरनाक फाइल को किसी फोटो, वीडियो, जरूरी दस्तावेज या आकर्षक ऑफर, लॉटरी के नाम पर वॉट्सऐप, एसएमएस या सोशल मीडिया के जरिए भेजते हैं। जैसे ही कोई यूजर फाइल पर क्लिक कर इंस्टॉल करता है, यह ऐप बैकग्राउंड में एक्टिव हो जाता है। इसके बाद फोन के कैमरे, कॉन्टैक्ट्स, गैलरी और मैसेजेस का पूरा एक्सेस ठगों के पास चला जाता है। इस ऐप के जरिए ठग आपकी मोबाइल स्क्रीन को लाइव देख सकते हैं। जब वे आपके खाते से ट्रांजेक्शन करते हैं, तो आने वाला ओटीपी और बैंक का मैसेज सीधे ठगों के पास फॉरवर्ड हो जाता है। पीडि़त को भनक तक नहीं लगती कि उसका खाता खाली हो चुका है।









