हाईटेक सिंहस्थ के लिए गूगल क्लाउड और भास्कराचार्य संस्थान के साथ मिलकर तैयार होगा डिजिटल चक्रव्यूह

पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म और एआई तकनीक से होगी भीड़ और ट्रैफिक की रियल-टाइम मॉनिटरिंग

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सिंहस्थ मेले को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करने के लिए शुक्रवार को संभागायुक्त आशीष सिंह (मेला अधिकारी) ने भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं जियोइन्फॉर्मेटिक्स संस्थान (बीआईएसएजी-एन) गांधीनगर के दल के साथ प्रत्यक्ष और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गूगल क्लाउड की टीम के साथ मंथन किया।
सम्राट विक्रमादित्य प्रशासनिक संकुल स्थित कलेक्टर सभागृह में भास्कराचार्य संस्थान के महानिदेशक टीपी सिंह ने सिंहस्थ को पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म और जियोग्राफिकल स्पेशल (भू-स्थानिक) तकनीक से जोडऩे पर विचार-विमर्श किया। संभागायुक्त ने उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) और नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे संस्थान के साथ समन्वय कर प्रोजेक्ट का फाइनल प्लान तैयार करें।
संभागायुक्त ने गूगल क्लाउड के प्रेजेंटेशन के बाद अधिकारियों को निर्देशित किया कि सिंहस्थ-2028 की आवश्यकताओं के अनुसार सभी तकनीकी विकल्पों का गहराई से अध्ययन किया जाए। उन्होंने कहा कि हमें उन क्षेत्रों को प्राथमिकता देनी है जहाँ आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से श्रद्धालुओं की सुविधा और प्रशासनिक दक्षता को अधिकतम स्तर तक बढ़ाया जा सके।
एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेगी ट्रेन, बस और पार्किंग की लाइव लोकेशन
भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं जियोइन्फॉर्मेटिक्स संस्थान के एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई) के माध्यम से सिंहस्थ से जुड़ी हर जानकारी को सिंगल डेटा प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा।
यह फायदे होंगे
250 किमी के दायरे में ट्रैफिक कंट्रोल- उज्जैन की ओर आने वाले रास्तों पर ट्रैफिक को आसानी से डायवर्ट और नियंत्रित किया जा सकेगा।
रूट की सटीक जानकारी- श्रद्धालुओं और प्रशासन को ट्रेनों, बसों के साथ-साथ छोटे वाहनों के रूट की लाइव जानकारी एक ही जगह मिल जाएगी।
स्मार्ट नेविगेशन- मेला क्षेत्र में पार्किंग स्थल, स्नान घाट, प्रमुख पहुंच मार्ग और आपातकालीन सूचनाएं उंगलियों पर उपलब्ध होंगी।
गूगल क्लाउड की एआई और जियो मैपिंग से संभलेगी करोड़ों की भीड़
गूगल क्लाउड की टीम ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स के जरिए करोड़ों श्रद्धालुओं के प्रबंधन का खाका खींचा। गूगल क्लाउड की यह तकनीक सिंहस्थ में इस तरह मददगार साबित होगी
मोबिलिटी पैटर्न का विश्लेषण- एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स की मदद से मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं के आने-जाने के पैटर्न का रियल-टाइम (उसी समय) विश्लेषण किया जा सकेगा।
भीड़ का पूर्वानुमान- प्रमुख मंदिरों, शिप्रा नदी के घाटों और रास्तों पर कितनी भीड़ बढऩे वाली है, इसका अनुमान प्रशासन को पहले ही हो जाएगा, जिससे भगदड़ जैसी स्थितियों को रोका जा सकेगा।
स्मार्ट मोबाइल एप- श्रद्धालुओं के लिए डिजिटल मैप, दिशा-निर्देश, घाटों पर उपलब्ध सुविधाएं और आपातकालीन संदेशों को प्रसारित करने के लिए मोबाइल आधारित सूचना प्रणाली विकसित की जाएगी।









