Popup Image
Advertisement

लाठीचार्ज से आंसू गैस तक, प्रदर्शन के दौरान पुलिस कब क्या कार्रवाई कर सकती है?

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के बीच पुलिस की कार्रवाई को लेकर चर्चा हो रही है। प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस जरूरत के हिसाब से चेतावनी देने, बैरिकेडिंग करने और कुछ परिस्थितियों में बल प्रयोग करने जैसे कदम उठा सकती है। लेकिन क्या पुलिस किसी भी प्रदर्शन में सीधे लाठीचार्ज या आंसू गैस का इस्तेमाल कर सकती है? आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि कानून इस बारे में क्या कहता है।

Advertisement

सबसे पहले चेतावनी और बातचीत का रास्ता

किसी प्रदर्शन के दौरान पुलिस की पहली कोशिश आमतौर पर लोगों से बातचीत करने और स्थिति को शांत रखने की होती है। अगर किसी जमावड़े से कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा हो, तो पुलिस लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को चेतावनी दे सकती है और जरूरत पड़ने पर वहां से हटने के निर्देश दे सकती है। संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग भी की जा सकती है। हालांकि, केवल प्रदर्शन करने या सरकार की आलोचना करने के कारण बल प्रयोग को उचित नहीं माना जा सकता। कार्रवाई की वैधता परिस्थितियों और लागू कानून पर निर्भर करती है।

Advertisement

पुलिस कब दे सकती है भीड़ को हटने का आदेश?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 148 गैरकानूनी जमावड़े को नागरिक बल की मदद से तितर-बितर करने से संबंधित है। वहीं, धारा 163 तत्काल खतरे या संभावित गड़बड़ी को रोकने के लिए जरूरी आदेश जारी करने का प्रावधान करती है। इन प्रावधानों का इस्तेमाल संबंधित कानूनी शर्तों के तहत किया जाता है। किसी प्रदर्शन पर कौन-सा नियम लागू होगा, यह मौके की स्थिति और प्रशासनिक आदेशों पर निर्भर करता है।

Advertisement

वॉटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल कब होता है?

अगर चेतावनी के बाद भी भीड़ हिंसक हो जाए या स्थिति को नियंत्रित करना मुश्किल हो, तो परिस्थितियों के अनुसार पुलिस वॉटर कैनन या आंसू गैस का इस्तेमाल कर सकती है। वॉटर कैनन का उद्देश्य भीड़ को पीछे हटाना होता है, लेकिन इससे भी चोट लग सकती है। इसी तरह आंसू गैस से आंखों और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। इसलिए इनके इस्तेमाल के दौरान आसपास मौजूद लोगों, बच्चों, बुजुर्गों और अन्य संवेदनशील व्यक्तियों की सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। इन उपायों का इस्तेमाल भी तय प्रक्रियाओं और परिस्थितियों के अनुरूप ही किया जाना चाहिए।

पुलिस लाठीचार्ज कब कर सकती है?

लाठीचार्ज पुलिस की कार्रवाई का गंभीर कदम है। इसे प्रदर्शनकारियों को सजा देने के तरीके के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। अगर स्थिति हिंसक हो जाए, लोगों की सुरक्षा को खतरा हो और कम कठोर उपाय पर्याप्त न हों, तो लागू नियमों के तहत बल प्रयोग पर विचार किया जा सकता है। ऐसी कार्रवाई में बल की मात्रा परिस्थिति के अनुपात में होनी चाहिए। जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग, अंधाधुंध वार और लोगों की सुरक्षित निकासी की अनदेखी गंभीर सवाल खड़े कर सकती है। स्थिति नियंत्रण में आने के बाद बल प्रयोग रोकना भी जरूरी है।

रबर की गोलियां और दूसरे कम घातक हथियार

भीड़ नियंत्रण के लिए कुछ परिस्थितियों में रबर की गोलियों जैसे कम घातक माने जाने वाले उपकरणों का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन कम घातक होने का मतलब यह नहीं है कि उनसे चोट नहीं लग सकती। इनके कारण आंखों, चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर या स्थायी नुकसान हो सकता है। इनका इस्तेमाल संबंधित मंजूरी, सुरक्षा उपायों और लागू ऑपरेशनल नियमों के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

पुलिस असली गोली कब चला सकती है?

असली गोली चलाना बल प्रयोग का अत्यंत गंभीर रूप है। इसे सामान्य भीड़ नियंत्रण का विकल्प नहीं माना जा सकता। किसी भी परिस्थिति में इसका इस्तेमाल कानूनी अधिकार, खतरे की गंभीरता और लागू सख्त शर्तों के आधार पर ही उचित ठहराया जा सकता है। हवा में गोली चलाना या पैरों पर निशाना लगाना भी जोखिम-मुक्त नहीं है। इससे किसी की जान जा सकती है या गंभीर चोट लग सकती है। इसलिए यह मान लेना गलत होगा कि इस तरह गोली चलाने से किसी की मौत नहीं हो सकती।

पुलिस की कार्रवाई में सबसे जरूरी क्या है?

प्रदर्शन के दौरान पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ लोगों की सुरक्षा करना भी है। कार्रवाई करते समय जरूरत, अनुपात और कम से कम आवश्यक बल के सिद्धांत महत्वपूर्ण होते हैं। कौन-सा कदम कानूनी रूप से उचित है, इसका फैसला वास्तविक परिस्थितियों, उपलब्ध तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर किया जाता है।

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें