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पाकिस्तान में स्कूल की छत गिरने से 35 की मौत

पेशावर के दीर कॉलोनी में हादसा, 40 से ज्यादा घायल; स्कूल मालिक गिरफ्तार, जांच के आदेश

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पेशावर। पाकिस्तान के पेशावर में गुरुवार को एक निजी स्कूल की छत गिरने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 35 हो गई है। मृतकों में 34 छात्र और एक महिला शिक्षक शामिल हैं। सभी बच्चों की उम्र 13 साल या उससे कम बताई गई है। हादसे के बाद स्कूल के मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है।

यह घटना पेशावर के दीर कॉलोनी इलाके में हुई। हादसे में 40 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। घायलों के इलाज के लिए अस्पताल में आपात स्थिति घोषित कर दी गई है। ट्रॉमा वार्ड में डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को तैनात किया गया है।

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प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जताया दुख

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हादसे में हुई मौतों पर गहरा दुख जताया। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए इस कठिन समय में उन्हें हिम्मत देने की प्रार्थना की। प्रधानमंत्री ने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की और अधिकारियों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने तथा बचाव अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए।

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गवर्नर ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट

खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने भी हादसे पर दुख जताया। उन्होंने बच्चों की मौत को बेहद दुखद त्रासदी बताते हुए घायल बच्चों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। गवर्नर ने संबंधित अधिकारियों को घायलों के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने और स्कूल की छत गिरने की घटना की विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही हादसे की वजह का पता लगाने को कहा है।

छह महीने में स्कूलों से जुड़े चार बड़े हादसे

पाकिस्तान में स्कूलों और अन्य इमारतों के ढहने की घटनाओं ने निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े किए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले छह महीनों में स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े चार बड़े हादसे सामने आए।

  • उमरकोट, जुलाई: सरकारी स्कूल की बाहरी दीवार गिरने से तीन बच्चियों की मौत हुई।
  • लाहौर, जुलाई: बागबानपुरा इलाके में निर्माणाधीन निजी स्कूल की छत गिरने से एक बच्चे की मौत हुई।
  • लाहौर, जून: कहना इलाके में ट्यूशन सेंटर की छत गिरने से 14 बच्चों की जान चली गई।
  • डेरा गाजी खान, मई: स्कूल की छत गिरने से चार बच्चों की मौत हुई और 20 लोग घायल हुए।

लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने शैक्षणिक संस्थानों में भवन सुरक्षा, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और नियमित निरीक्षण की जरूरत को फिर उजागर किया है।

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