20 करोड़ रुपए में संवर रहा सवा सौ साल पुराना भवन, आसपास के नहीं हटे कब्जे

कोठी पैलेस बन रहा वीर भारत संग्रहालय लोकायुक्त दफ्तर नहीं हो सका शिफ्ट
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। शहर का सवा सौ साल से ज्यादा पुराना कोठी पैलेस जल्द ही वीर भारत संग्रहालय बन जाएगा। 20 करोड़ रुपयों से इसे संवारने का काम शुरू हो गया है, लेकिन अब तक लोकायुक्त दफ्तर (संभागीय सतर्कता समिति, लोकायुक्त संगठन) को दूसरी जगह शिफ्ट नहीं किया जा सका है। कोठी पैलेस के पीछे भी होटलों और अन्य कब्जे हटाए नहीं जा सके हैं। इससे संग्रहालय का प्रोजेक्ट प्रभावित होने की आशंकाएं उठ रहीं। यह देश ही नहीं दुनिया का पहला ऐसा संग्रहालय होगा जहां भारत का शौर्य एक जगह देखा जा सकेगा।
सिंधिया रियासत के समय पुराने समय में बने कोठी महल को वीर भारत संग्रहालय का रूप देने का काम शुरू हो गया है। अभी इसकी दीवारों की छिलाई की जा रही है। प्राचीन काल में बनाई गई दीवारों को फिर से संवारने के लिए सीमेंट प्लास्टर को उखाड़ा जा रहा है, जिससे इसका प्राचीन सौंदर्य निखरता जा रहा। अभी इसी कार्य में समय ज्यादा लगने की संभावना है, क्योंकि दीवारें बहुत ऊंची हैं। नए प्रशासनिक संकुल के सामने बने द्वार के पास लोकायुक्त कार्यालय अभी तक शिफ्ट नहीं हो सका है।
कोठी महल पैलेस परिसर का यह एकमात्र ऐसा दफ्तर है, जो अब तक दूसरी जगह शिफ्ट नहीं हो सका है। इसी द्वार से मलबा निकालने का काम भी किया जा रहा और जेसीबी भी लाई ले जा रही। इससे लोकायुक्त दफ्तर के काम भी प्रभावित हो रहे। ऐसे में कोठी पैलेस को तेजी से संग्रहालय का रूप देने में परेशानियां आ रहीं। सूत्रों के अनुसार इसके लिए प्रशासन से दूसरी जगह मांगी गई है। लोकायुक्त डीएसपी दिनेश पटेल ने बताया इसे शिफ्ट करने की प्रक्रिया चल रही है।
पुरानी सीढ़ी नहीं हटेगी, देंगे नया स्वरूप: कोठी पैलेस में लकड़ी से बनी पुरानी सीढिय़ों को नहीं हटाया जाएगा। इनको नया स्वरूप देकर संरक्षित किया जाएगा। पुराने समय की ये सीढिय़ां शिल्प कला का बेजोड़ उदाहरण हैं।।इस कारण इन सीढिय़ों को संरक्षित किया जाएगा।
पूरा कैंपस संग्रहालय के रूप में विकसित होगा, लेकिन अतिक्रमण हटाने में सुस्ती.
कोठी पैलेस सहित पूरा कैंपस वीर भारत संग्रहालय के रूप में विकसित होगा। वीर भारत न्यास के सचिव एवं मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी के अनुसार यह संग्रहालय पूरी दुनिया के लिए अद्भुत होगा। कोठी पैलेस के सामने बृहस्पति भवन तक इसे विस्तारित करने की योजना है।
दूसरी ओर कोठी पैलेस के आसपास चाय की दुकानें और अन्य दफ्तर आज भी इसी जगह स्थापित हैं। प्रशासन इन्हें हटाने की कार्रवाई नहीं कर पा रहा, जिससे संग्रहालय का काम प्रभावित होने के आसार बन रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसकी आधारशिला 30 मार्च को केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के साथ रखी थी। पांच माह बाद भी प्रशासन कोठी पैलेस को अतिक्रमण से मुक्त नहीं करा सका है।
यह है संग्रहालय की योजना
करीब 40 हजार पुराना भारत का इतिहास यहां संग्रहित किया जाएगा।
भगवान श्रीराम की 96 पीढिय़ों सहित वैदिक, उत्तर वैदिक के नायकों का चित्रण होगा।देश को गौरवान्वित करने वाले तेजस्वी नायकों, सत्पुरुषों की प्ररेक कथा, उनके चरित्रों का चित्रांकन पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों से किया जाएगा।
वैदिक काल परंपरा, खगोल विज्ञान जैसी कई पुरानी कला और परंपरा के बारे में भी जानकारी रहेगी।
तेजी से चल रहा काम
वीर भारत संग्रहालय शासन की महत्वाकांक्षी योजना है और इसका काम तेजी से चल रहा है। सिंहस्थ 2028 से पहले यह संग्रहालय स्थापित करने की योजना है।-श्रीराम तिवारी, सचिव वीर भारत न्यास










