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तारों की दुनिया और चंद्रमा के पहाड़ों को नजदीक से देखने-जानने का मौका

जीवाजी वेधशाला में आज से शुरू होगा आकाशीय अवलोकन शिविर

जीवाजी वेधशाला में आज से शुरू होगा आकाशीय अवलोकन शिविर

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आधुनिक टेलिस्कोप से दिखाएंगे नजारे

अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले बच्चों और बड़ों के लिए एक रोमांचक खबर है। वर्तमान में शाम के समय आसमान में अद्भुत खगोलीय नजारे दिखाई दे रहे हैं। सूर्यास्त के ठीक बाद पश्चिम दिशा में लट्टू की तरह बेहद चमकदार शुक्र ग्रह दिखाई दे रहा है। वहीं, पश्चिमी आकाश में लगभग 60 अंश पर सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति अपनी पूरी आभा के साथ चमक रहा है, जबकि शुक्ल पक्ष का प्रतिदिन बढ़ता हुआ चंद्रमा भी इस आकाशीय दृश्य को और खूबसूरत बना रहा है।

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इन तीनों अद्भुत खगोलीय पिण्डों को नजदीक से देखने और ब्रह्मांड से जुड़े रहस्यों को समझने का यह सबसे बेहतर अवसर है। इन्हीं खगोलीय स्थितियों को ध्यान में रखते हुए शासकीय जीवाजी वेधशाला ने 21 से 28 मई तक आठ दिवसीय ग्रीष्मकालीन आकाशीय अवलोकन शिविर का विशेष आयोजन किया है। वेधशाला प्रबंधन के अनुसार, इस शिविर का समय प्रतिदिन सायं 7 से रात 9 बजे तक रहेगा। शिविर में 10 वर्ष से अधिक उम्र का कोई भी जिज्ञासु नागरिक या विद्यार्थी शामिल हो सकता है।

टेलिस्कोप से दिखेगा चंद्रमा का धरातल

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शिविर के अंतर्गत वेधशाला के विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण आकाशीय जानकारियां और खगोल विज्ञान के बुनियादी सिद्धांत समझाए जाएंगे। इसके साथ ही वेधशाला में स्थापित बेहद शक्तिशाली 8 इंच व्यास वाले टेलिस्कोप के माध्यम से चंद्रमा की सतह पर मौजूद बड़े-बड़े गड्ढे (क्रेटर) और पहाड़ों को बेहद करीब से दिखाया जाएगा। आकाशीय दर्शन के लिए प्रति सहभागी केवल 20 रुपए का मामूली प्रवेश शुल्क तय किया गया है।

रात 8 बजे से पहले आएं अन्यथा नहीं दिखेगा शुक्र ग्रह, साफ आकाश जरूरी

वेधशाला अधीक्षक डॉ. राजेंद्र गुप्त ने बताया कि शुक्र ग्रह वर्तमान में आकाश में नीचे की स्थिति में होने के कारण रात 8 बजे के बाद टेलिस्कोप की रेंज से बाहर हो जाएगा। इसलिए जो भी शुक्र ग्रह को देखना चाहते हैं, उन्हें हर हाल में रात 8 बजे से पहले वेधशाला पहुंचना होगा। टेलिस्कोप से आकाशीय पिंडों को स्पष्ट देखने के लिए आकाश का पूरी तरह से साफ और खुला होना अनिवार्य है। यदि मौसम खराब होता है या आसमान में बादल छाए रहते हैं, तो ऐसी स्थिति में आकाशीय अवलोकन संभव नहीं हो सकेगा।

यह देख सकेंगे वेधशाला की दूरबीन से

चंद्रमा की सतह पर मौजूद बड़े-बड़े गड्ढे (क्रेटर) और पहाड़।

सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति की सतह पर बनी रंगीन पट्टियों और उसके चारों ओर चक्कर लगा रहे उपग्रह।

पृथ्वी के सबसे नजदीकी ग्रह शुक्र को उसकी विभिन्न कलाओं (चन्द्रमा की तरह घटते-बढ़ते रूप) के साथ लाइव।

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