नीलगायों का आतंक होगा कम, फॉरेस्ट टीम ने बृजराजखेड़ी में लगाया एनक्लोजर

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन. नीलगायों का आतंक कम करने के लिए फॉरेस्ट टीम ने सोमवार को बोमा अभियान की शुरुआत की। बृजराजखेड़ी में टीम ने एनक्लोजर (बाड़ा) बनाया है। यहां तक नीलगायों को खदेड़कर लाया जाएगा और उन्हें बंद किया जाएगा।

दरअसल, उज्जैन में नीलगायों की तादाद काफी बढ़ गई है। जिले में 14 ऐसे क्षेत्र हैं, जहां इनके कारण किसानों को फसल लेने में दिक्कत हो रही है। यह फसल तो चट करती ही हैं, दौड़कर उनके नष्ट भी कर देती हैं। काफी ताकतवर और फुर्तीली होने से इन्हें पकडऩा मुश्किल होता है।
कई बाद यह हादसों का कारण भी बनती हैं। चूंकि, नीलगाय वन्यप्राणी की श्रेणी में आती हैं, ऐसे में इन्हें मारा भी नहीं जा सकता। इन सब स्थितियों को देखते हुए इन्हें बोमा लगाकर पकड़ा जा रहा है। इसके लिए वन विभाग की टीम ने बृजराजखेड़ी में एनक्लोजर बनाना शुरू किया। इसके तहत तारबंदी कर एक बड़े एरिया को कवर किया गया। अब यहां नीलगायों को घेरकर लाया जाएगा।
क्या है बोमा (एनक्लोजर)
बो मा जंगली जानवरों को घेराबंदी करके पकडऩे की पद्धति है। इसमें अलग-अलग तरीके से जानवरों को खदेड़कर एक बाड़े (एनक्लोजर) में लाया जाता है। देवास और शाजापुर में कृष्ण मृग को घेरने में इसका उपयोग किया गया था। तब हेलिकॉप्टर से इन्हें घेरा गया था। नीलगायों को हेलिकॉप्टर से नहीं घेरा जा सका, इसलिए इन्हें पारंपरिक तरीके से एनक्लोजर में लाया जाएगा।
14 क्षेत्र प्रभावित बृजराजखेड़ी-हरसोदन में ज्यादा
डीएफओ अनुराग तिवारी बताते हैं कि उज्जैन जिले में 14 क्षेत्र नीलगाय से ज्यादा प्रभावित हैं। इनमें बृजराजखेड़ी, हरसोदन, पिपल्याहामा, नरवर, दताना-मताना हवाईपट्टी वाले इलाके प्रमुख हैं। इनमें भी बृजराजखेड़ी, पिपल्याहामा में फीमेल हर्ड (मादा झुंड) है। इनको मेल की तुलना में घेरना आसान है। एक हर्ड में अमूमन 20 से 25 नीलगाय होती हैं। फीमेल हर्ड में इनकी संख्या ज्यादा होती है। ऐसे में बृजराजखेड़ी से शुरुआत कर रहे है। अगर बोमा के नतीजे अच्छे आते हैं तो अन्य क्षेत्रों में भी इसे लागू किया जाएगा।









