आकाशवाणी के 90 साल : पहले रेडियो रखने के लिए लेना पड़ता था लाइसेंस

उज्जैन आकाशवाणी से आज विशेष कार्यक्रम
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। 90 साल पहले आज ही दिन आल इंडिया रेडियो का जन्म हुआ था। अब इसे आकाशवाणी के नाम से जाना जाता है। तब रेडियो रखने के लिए लाइसेंस लेना पड़ता था। भारतीय डाक एवं तार विभाग यह लाइसेंस जारी करता था। हर साल लाइसेंस का नवीनीकरण कराना होता था। उज्जैन का आकाशवाणी केंद्र 90 साल पूरे होने पर सोमवार को युववाणी में विशेष कार्यक्रम की प्रस्तुति देगा।
डॉ. संजीव कुमार तिवारी ने बताया कि 23 जुलाई 1927 को मुंबई में इंडिया ब्रॉडकॉस्टिंग कंपनी की स्थापना की गई थी। तब यह जन-जन तक सूचना पहुंचाने का सबसे तेज माध्यम था। 8 जून 1936 को इसका नाम बदलकर आल इंडिया रेडियो कर दिया गया था। 1956 में इसका नाम तीसरी बार बदलकर आकाशवाणी कर दिया गया। पिछले साल उज्जैन में आकाशवाणी केंद्र शुरू किया गया था। 90 साल के मौके पर आकाशवाणी का उज्जैन केंद्र विशेष कार्यक्रम की प्रस्तुति देगा।
कार्यक्रम के संयोजक सौरभ अवस्थी, सूत्रधार आशुतोष तिवारी और सहयोगी तनिषा जैन ने बताया कि कभी रेडियो रखने के लिए भारतीय डाक-तार विभाग लाइसेंस जारी करता था। आशुतोष तिवारी के दादा श्रीराम तिवारी ने 15 मई 1972 को उज्जैन में यह लाइसेंस लिया था। गुजराती समाज धर्मशाला नईसड़क पर स्थित डाकतार विभाग ने टीआर-२ का तब रजिस्ट्रेशन किया था। हर साल इसका नवीनीकरण कराना होता था।
डॉ. संजीव कुमार तिवारी ने बताया कि युववाणी में हिंदी सिनेमा के यादगार गीत इस मौके पर प्रसारित किए जाएंगे। श्रोता इसे आकाशवाणी के एफएम केंद्र से सुन सकेंगे। वह शाम 5 से 6 के बीच फोन नंबर 0734-4054191 पर कॉल कर अपने अनुभव भी साझा कर सकेंगे।
आकाशवाणी के मालवी लोकगीत कार्यक्रम में अभिभाषक सुदर्शन लड्ढा का इंटरव्यू प्रसारित किया। उन्हें विषय विशेषज्ञ के तौर पर बुलाया गया था।









