एमआईसी मैंबर प्रकाश शर्मा के पुत्र की मुश्किल बढ़ी, अग्रिम जमानत निरस्त

सुप्रीम कोर्ट नहीं गए तो सरेंडर करना पड़ेगा

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। युवती से रेप के आरोपी एमआईसी सदस्य प्रकाश शर्मा के पुत्र सार्थक शर्मा की अग्रिम जमानत हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के जस्टिस आलोक अवस्थी ने खारिज कर दी है। पुलिस से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ेगा, नहीं तो सरेंडर करना होगा।
दरअसल सार्थक शर्मा के खिलाफ एक तलाकशुदा महिला ने शादी का झांसा देकर रेप करने की एफआईआर दर्ज कराई थी। 18 अप्रैल को दर्ज एफआईआर में महिला ने बताया था कि तलाक के बाद आरोपी ने उससे नजदीकियां बढ़ाई। फिर शादी करने का झांसा देकर पहली बार होटल गंगा पैलेस में संबंध बनाए। फिर यह सिलसिला चलता रहा। वह वाट्स एप पर चैट करते समय हमेशा शादी का भरोसा देता रहा। 28 जनवरी 2026 से जब उसने शादी करने की बात की तो सार्थक महिला को टालता रहा। ऐसे में उसने रेप का प्रकरण दर्ज कराया।
फरार चल रहा है सार्थक
प्रकरण दर्ज होने के बाद सार्थक फरार हो गया। उसकी तरफ से चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश उज्जैन की अदालत में अग्रिम जमानत मांगी गई, जो निरस्त हो गई। ऐसे में सार्थक ने हाई कोर्ट का रूख किया था। यहां उसकी तरफ से सीनियर एडव्होकेट विवेक सिंह ने जमानत देने की दलील दी। इसका विरोध सरकारी अभिभाषक भास्कर अग्रवाल और महिला के वकील शिवेंद्र सिंह परिहार ने किया। परिहार ने सार्थक और महिला के बीच हुई वाट्स एप चैट सामने रखी। महिला का बयान भी पढ़कर सुनाया। दलील से संतुष्ट होकर जस्टिस आलोक अवस्थी ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
परिहार ने बताया कि अग्रिम जमानत निरस्त होने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट जाना होगा, या सरेंडर करना होगा।









