उज्जैन में खुलेगा डीपटेक रिसर्च एंड डिस्कवरी सेंटर, IIT इंदौर करेगा मदद

इंजीनियरिंग कॉलेज में जगह फाइनल, पीएस ने संभागायुक्त और कलेक्टर के साथ की बैठक

अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। उज्जैन को एक और सुविधा मिलने वाली है। शहर में डीपटेक रिसर्च एंड डिस्कवरी सेंटर खोलने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सेंटर को जल्द से जल्द शुरू करने के लिए पीएस ने संभागायुक्त और कलेक्टर के साथ मीटिंग की और जगह का चयन भी किया। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेलवेंद्रन ने प्रोजेक्ट को लेकर तारामंडल में बैठक की।
मैपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी और आईआईटी इंदौर की टीम भी मीटिंग में मौजूद थी। मीटिंग में उज्जैन में साइंस सिटी बनाने पर भी विचार किया गया। शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में सेंटर की जगह चुनी गई आईआईटी इंदौर के साथ मिलकर यह सेंटर तैयार किया जाएगा।
एजुकेशन और रिसर्च का हब बनाने की तैयारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन के अनुरूप, प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रमुख निवेश (लीड इन्वेस्टमेंट) आकर्षित करने के लिए यह प्रोजेक्ट लाया गया है। उज्जैन में बनने वाला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस डीपटेक रिसर्च सेंटर होगा। गौरतलब है कि सीएम डॉ. यादव ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की समीक्षा बैठक में उज्जैन में मेडी सिटी, साइंस सिटी और इंजीनियरिंग कॉलेज को विकसित करने के निर्देश दिए थे। इसी कड़ी में मेडिकल, साइंस और टेक्निकल एजुकेशन के लिए वल्र्ड-क्लास सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) और डीपटेक रिसर्च सेंटर बनाया जा रहा है।
क्या होता है डीप टेक रिसर्च एंड डिस्कवरी सेंटर
यह एक अत्याधुनिक अनुसंधान केंद्र होता है, जो एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, नैनोटेक्नोलॉजी और बायो-साइंस जैसी मूलभूत वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग जैसे विषयों पर काम करता है? इसका मुख्य उद्देश्य जटिल समस्याओं का समाधान खोजना और क्रांतिकारी तकनीकों का विकास करना होता है। इन केंद्रों के मुख्य कार्य मेें गहन वैज्ञानिक अनुसंधान शामिल हे।
यह पारंपरिक सुधारों के बजाय एआई, रोबोटिक्स, एडवांस्ड मटेरियल साइंस जैसे नए और जटिल क्षेत्रों में मौलिक खोजों पर केंद्रित होता है। ये केंद्र नवोदित शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और उद्यमियों को एक ऐसा मंच प्रदान करते हैं जहां वे प्रोटोटाइप तैयार कर सकें और अत्याधुनिक पेटेंट का निर्माण कर सकें? चूंकि इन प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और विकास चक्र लंबा होता है, इसलिए ऐसे केंद्रों में भारी पूंजी, विशिष्ट उपकरणों और विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है।









