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शिप्रा आरती में मारपीट के बाद ऑपरेशन रामघाट क्लीन

नगर निगम की टीम ने गुमटियों के साथ-साथ आरती के लाउडस्पीकर भी हटाए

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उज्जैन। रामघाट पर शिप्रा आरती के दौरान व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के चलते हुई मारपीट की घटना के बाद बुधवार को नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई की। निगम की टीम ने रामघाट को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए यहां लगे हाथ ठेले-गुमटियों को हटा दिया। इसके साथ ही शिप्रा आरती के लिए लगे लाउड स्पीकर भी जब्त कर लिए हैं।

रविवार शाम शिप्रा आरती के दौरान दीपक फूल बत्ती बेचने वाली महिलाओं और घाट के पंडितों के बीच मारपीट हुई थी। यह घटना शर्मिंदा करने वाली थी। दस सेकंड के सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को देखकर देशभर से तीखी प्रतिक्रियाएं आई थीं। इससे पवित्र धार्मिक स्थल की छवि भी प्रभावित हुई थी। महाकाल पुलिस ने इस मामले में दोनों पक्षों के खिलाफ क्रॉस कार्रवाई की थी।

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पुलिस प्रशासन के साथ निगम की बड़ी कार्रवाई

बुधवार को नगर निगम ने पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर बड़ी कार्रवाई की। निगम की टीम ने पूरे रामघाट क्षेत्र में सख्ती बरतते हुए अवैध अतिक्रमण को पूरी तरह से हटा दिया। निगम की रिमूवल गैंग ने घाट क्षेत्र से 8 नग लाउडस्पीकर, 5 गुमटियां, 1 काउंटर और 5 हाथ ठेले तो हटाए ही , उन्हें जब्त करने की कार्रवाई भी की। कार्रवाई के दौरान नगर निगम की टीम ने क्षेत्र में मुनादी कर चेतावनी भी दी गई कि यदि इस कार्रवाई के बाद दोबारा किसी ने अतिक्रमण करने का प्रयास किया, तो उसके खिलाफ और अधिक सख्त और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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1 रुपए का सामान बिकता है 20 में, आरती दक्षिणा में भी मनमानी

आस्था का व्यापार

शिप्रा आरती रामघाट पर बरसों से की जा रही है। कुछ महीने पहले तक यह रामघाट और दत्त अखाड़ा घाट पर पंरपरागत रूप से की जाती थी। पंरपरांपगत वाद्य यंत्र के माध्यम से अधिकृत पुजारी विधि विधान से आरती करते थे। आरती का समय भी अधिकतम आधा घंटा होता था। पिछले कुछ समय से रामघाट पर शिप्रा आरती का व्यावसायिक रूप नजर आने लगा है। रामघाट पर ही करीब आठ से दस स्थानों पर विभिन्न पंडे-पुजारी मंच बनाकर आरती करते हैं। लाउड स्पीकर के जरिए श्रद्धालुओं को आकर्षित किया जाता है। दक्षिणा के मुताबिक श्रद्धालु को आरती करने का मौका, आरती दर्शन के लिए बैठक व्यवस्था आदि तय होती है। धीरे-धीरे भीड़ बढऩे लगी और रोज १ से ५ हजार के बीच लोग आरती दर्शन के लिए रामघाट पहुंचने लगे। पंडे-पुजारी के वेश में कई लोग वहां तख्त लगाकर आरती के लिए खड़े रहते हैं। आरती शुरू होते ही ये 100 से 500 रुपए की दक्षिणा लेकर श्रद्धालुओं को आरती ऑफर करते हैं।

दीपदान से गंदगी फैल रही शिप्रा में- आरती में लोगों की संख्या देख यहां एक दोने मेें फूल बत्ती, कुछ फूल बेचने वालों की संख्या भी बढ़ गई। ये लोग छोटे-छोटे बच्चे और लड़कियों के साथ घाट पर जमा हो गए और २० रुपए मेें दीपदान का सामान बेच रहे हैं। एक दोना, दो बत्ती और चार-छह फूल, यानी सामान कुल जमा 1 से 5 रुपए का, और बिकता है २० रुपए में। आरती शुरू होते ही दीपदान की भी होड़ मच जाती है। मां शिप्रा के आंचल में सैकड़ों दोने पहुंच जाते हैं जो चंद मिनट ही नदी में डूब जाते हैं और गंदगी फैलाते हैं।

पिकनिक स्पॉट बना दिया धार्मिक स्थल को- बढ़ती भीड़ देख खान-पान की दुकानें भी यहां तेजी से बढ़ गर्इं। तमाम तरह की चाट-पकौड़े, आइसक्रीम सहित तरह-तरह की दुकानें यहां लग गईं। लंबे समय से यह व्यापार चल रहा था। अब विवाद के बाद नगर निगम सक्रिय हुई यह कार्रवाई की।

गंदगी के खिलाफ आवाज उठाई तो हम ही कठघरे में आ गए

हम लोग यहां आने वाले लोगों को शिप्रा आरती के पहले गंदगी नहीं करने, जल संरक्षण की समझाइश देते हैं। रोज सैकड़ों लोग इसका संकल्प लेते हैं। हमने नगर निगम को पहले कई बार शिकायत की कि दीपदान के बहाने नदी में गंदगी फैलाई जा रही है। दीपदान सामग्री बेचने वालों पर रोक लगाएं। क्योंकि दीपदान एक प्रक्रिया के तहत संकल्प के साथ घाट पर होता है। नदी में दीपक छोडऩे से नहीं। फूड जोन की गंदगी से भी आगाह किया। लेकिन नगर निगम ने हमे ही कठघरे में खड़ा कर दिया। धार्मिक कार्यक्रमों की भव्यता के लिए सरकार तमाम आयोजन कर रही है। यहां हमें रोका जा रहा है। यह गलत है।

पं. राजेश त्रिवेदी, अध्यक्ष श्री क्षेत्र पंडा समिति

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