महाकाल क्षेत्र में बेच रहे थे हथजोड़ी व उल्लू के दांत, आरोपी दंपति गिरफ्तार

तंत्र-मंत्र के नाम पर वन्य जीव के अंगों की खुलेआम चल रही बिक्री

चमत्कारी नहीं है हथजोड़ी इसे रखना भी अपराध
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। महाकाल मंदिर क्षेत्र में वन विभाग ने वन्यजीवों के अवैध व्यापार के खिलाफ तीसरे दिन दूसरी कार्रवाई की है। इस बार पति-पत्नी को खुलेआम उल्लू के दांत और हथ जोड़ी बेचते हुए पकड़ा है। टीम को इनके पास से 26 हथजोड़ी व उल्लू के दांत मिले हैं। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी श्रद्धालुओं को तंत्र-मंत्र, अचूक धन लाभ और व्यापार में तरक्की का झांसा देकर इन्हें ऊंचे दामों पर बेचने की फिराक में थे।
वन विभाग की टीम को पिछले कई दिनों से क्षेत्र में इस तरह का व्यापार चलने की सूचना मिल रही थी। दो दिन पहले 2 जुलाई को वन विभाग की टीम ने हरसिद्धि मंदिर के सामने एक दुकान पर हथजोड़ी बेच रहे युवक को पकड़ा था। उसके पास से 7 हथजोड़ी पकड़ी थी। इसके बाद यहां चौकसी बढ़ाई तो शनिवार दोपहर को यहां पति-पत्नी हथजोड़ी और उल्लू के दांत बेचते पाए गए।
वन विभाग एसडीओ विक्रमसिंह सोलंकी ने बताया कि आरोपी खरगोन जिले के बरसाना पिता सरदार और उसकी पत्नी हेमामालिनी है। ये पारदी समुदाय के हैं और पूछताछ में सामने आया कि ये जगह-जगह घूमकर वन्य जीवों के अंगों का व्यापार करते हैं।ये लोगों को यह विश्वास दिलाते थे कि इस हथजोड़ी को तिजोरी या दुकान में रखने से सुख-समृद्धि और अपार धन की प्राप्ति होती है। इसी भ्रम और आस्था का फायदा उठाकर वे भक्तों से मोटी रकम ऐंठ रहे थे। इनके पास से 26 हथजोड़ी और उल्लू के दांत जब्त किए गए हैं। इन अंगों को जांच के लिए लैब भेजा है, वहां से रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) अनुराग तिवारी ने बताया कि अंधविश्वास के बाजार में जिसे हथजोड़ी कहकर बेचा जाता है, वह वास्तव में कोई चमत्कारी वनस्पति या वस्तु नहीं है। यह वन्य प्राणी गोह या गोहरा के शरीर का एक अंग है, जिसे सुखाकर हाथ जोड़े हुए स्वरूप में बदल दिया जाता है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत गोह को उच्च संरक्षण प्राप्त है और इसके किसी भी अंग का व्यापार, खरीद-बिक्री या उसे अपने पास रखना पूरी तरह से प्रतिबंधित और अपराध है। विभाग अब यह पता लगा रहा है कि प्रतिबंधित वन्यजीवों के ये अंग इन तक कहाँ से सप्लाई हो रहे थे और क्या इसके पीछे कोई संगठित अंतरराज्यीय गिरोह काम कर रहा है। इसके साथ ही, सोशल मीडिया और विभिन्न ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफॉम्र्स पर भी नजर रखी जा रही है, जहाँ इस तरह की प्रतिबंधित सामग्रियां बेची जा रही हैं।









