Advertisement

बारिश शुरू हुई और नर्सरियों में इंडोर फ्लावर व सजावटी पौधों की बिक्री बढ़ी

वन विभाग ने रानीपिपलिया में 14,500 पौधे लगाए, तराना वनक्षेत्र और पंचकोशी मार्ग पड़ाव क्षेत्र में भी पौधे लगाएंगे

 

Advertisement

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। बारिश का सीजन शुरू होते ही शहर और ग्रामीण क्षेत्र में पर्यावरण प्रेमी पौधे लगा रहे हैं। वहीं घर की सजावट के लिए नर्सरियों में इंडोर फ्लावर और सजावटी पौधों की बिक्री बढ़ गई है। नर्सरी से जहां सामान्य दिनों में 10 से 15 पौधे जाते थे इस सीजन में संख्या बढ़कर 100 से 125 तक हो गई है। सजावटी पौधों के लिए खाद और कीटनाशक की बिक्री भी बढ़ गई है। जिला पंचायत, नगर पालिका तथा वन विभाग द्वारा भी अभियान चलाकर पौधारोपण किया जा रहा है।

वन विभाग के एसडीओ विक्रमसिंह सोलंकी ने बताया रानी पिपलिया नजरपुर राजस्व क्षेत्र में 14,500 पौधे लगाए गए हैं। पंचकोसी मार्ग पड़ाव क्षेत्र में सन 2012-13 में लगाए पौधे बड़े हो गए हैं। इस साल करीब 15 हजार पौधे और लगाएंगे। तराना वन क्षेत्र में भी फलदार, छायादार, औषधि के डेढ़ लाख से अधिक पौधे लगाने की योजना है। योजना का पांच प्रतिशत पौधे आस्था वाले पौधे बिल्व पत्र, पीपल, बड़, आंवला आदि लगाएंगे। तुलसी के पौधे भी लगाने की योजना है। नर्सरी संचालक आशीष जाधव और देवेंद्र जाधव ने बताया जुलाई से मार्च तक सीजन चलता है। नर्सरी के लिए फूलदार और डेकोरेशन के पौधे पुणे से लाते हैं जबकि नीम, आंवला, तुलसी, बड़ आदि पौधे सरकारी नर्सरी में मिल जाते हैं। पौधों के पोषण के लिए 15 दिन में खाद देना आवश्यक है। जैविक खाद बाजार में उपलब्ध है, इसके लिए गोबर का उपयोग भी किया जा सकता है। पौधे की प्रकृति के अनुसार पानी भी नियमित देना चाहिए अन्यथा पौधा सूख जाएगा।

Advertisement

ग्रामीण क्षेत्र में पेड़ व शहरों में पौधे लगाते हैं

नर्सरी संचालक भुवनेश भार्गव ने बताया शहरी क्षेत्र में बगीचा लगाने के बजाय लोग गमले में फूलदार और सजावटी पौधे लगाते हैं। कुछ लोग औषधि के लिए और कुछ ज्योतिष के आधार पर आर्थिक उन्नति की कामना से पौधे लगाते हैं। पेड़ के लिए पीपल, बड़, आम, चीकू, अनार, मौसंबी, नींबू, शमी, बेलपत्र, बदाम और अशोक के पौधे ले जाते हैं। फूल और खुशबू के लिए गुलाब, मोगरा, चंपा, चमेली, कनेर, गंधराज, मधुकामिनी, मधुमालिनी, अपराजिता, एग्जोरा, लेवेंडर, गुड़हल, मार्निंग ग्लोरी, ओमोली, ट्रिकोमा, रातरानी की डिमांड है। सजावटी पौधों में रबर प्लांट, एरीफान, प्लोटन, स्नो व्हाइट, ड्रेसिना, स्नेक प्लांट, सिंगोनिया, केलेसिया, पीस लिलि, पेट्रा प्रोटोन, थाई प्लोटोन आदि कई तरह के पौधे हैं जो गमलों में लगाए जा सकते हैं।

Advertisement

जिले में करीब 70 नर्सरियां हैं
नर्सरी संचालक शैलेंद्र परमार और सूर्या ने बताया जिले में 10 बड़ी और करीब 60 छोटी नर्सरियां हैं। डेकोरेशन के लिए फूलदार पौधे और बेल ले जाते हैं। लगभग बराबर संख्या में दोनों तरह के पौधे बिक रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में जगह उपलब्ध रहती है इसलिए वे सजावटी पौधों के बजार फलदार और छायादार पेड़ लगाते हैं। वन विभाग द्वारा भी पौधारोपण करवाया गया है।

पौधारोपण में ही व्यय करते हैं जेबखर्चं
नर्सरी में पौधे खरीदने आए तिरुपति सॉलिटियर निवासी छात्र नरेंद्र किरार ने बताया घर की सजावट के लिए पौधे लगाना उनका शौक है। जेबखर्च इसी में पूरा होता है। स्नेक प्लांट सहित कई पौधे हैं जो 24 घंटे ऑक्सीजन देते हैं। इनको लगाना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक भी है। सजावटी और फूलदार पौधे भी लगाए हैं।

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें