व्यवहारिक नहीं होने से रेलवे स्टेशन पर लागू नहीं हुआ वन-वे प्लान

अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। सावन माह में भगवान श्रीमहाकालेश्वर के दर्शन के लिए बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्लेटफार्म नंबर १ से एंट्री और ८ से एग्जिट का वन-वे प्लान गुरुवार से लागू नहीं हो सका। रेलवे मंडल ने प्लान केा मंजूरी नहीं दी। आरपीएफ उज्जैन के थानाप्रभारी ने यह प्लान भेजा था। इसे रेलवे ने व्यवहारिक नहीं माना।
दरअसल, ज्यादा संख्या के अनुमान को देखते हुए आरपीएफ ने रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से आने वाले यात्रियों के लिए प्लेटफॉर्म 8 से (एक्जिट) और ट्रेनों से जाने वाले यात्रियों के लिए प्लेटफॉर्म नंबर १ से प्रवेश (एंट्री) का प्लान बनाकर अधिकारियों को भेजा था। यह व्यवस्था 29 जुलाई से 9 सितंबर तक लागू रहना थी परंतु इसे अनुमति नहीं मिली है। सावन के पहले दिन 30 जुलाई को यात्रियों का आना-जाना प्लेटफॉर्म 1 और ८ से लगातार जारी रहा।
पीआरओ मुकेश कुमार ने बताया यात्रियों की सुविधा को ध्यान रखना प्राथमिकता है। उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होना चाहिए। अभी एंट्री-एक्जिट को लेकर किसी तरह के आदेश जारी नहीं हुए हैं। पहले भीड़ की स्थिति देखेंगे फिर योजना बनाई जाएगी। आरपीएफ थाना प्रभारी नरेंद्र यादव ने कहा एंट्री एक्जिट प्लान को हेड ऑफिस से एप्रूवल नहीं मिला है। प्लान के अनुसार क्राउड मैनेजमेंट के लिए सर्कुलेशन एरिया को नॉन पार्किंग झोन बनाया है। मुख्य प्रवेश के सामने होल्डिंग एरिया बनाया जा रहा है। यात्रियों की सुविधा के लिए तैयारी की जा रही है।
वन-वे प्लान क्यों अव्यवहारिक
कई प्रमुख ट्रेन प्लेटफार्म नंबर १ से आती-जाती हैं। फ्रीगंज तरफ रहनेवाले अधिकतर लोग प्लेटफार्म नंबर ८ से एंट्री करते हैं और प्लेटफार्म नंबर १ पर ट्रेन में सवार होते हैं। एग्जिट के लिए वे प्लेटफार्म नंबर ८ का ही उपयोग करते हैं। पुराने शहर के लोग इन ट्रेन के लिए प्लेटफार्म १ से एंट्री करते हैं और इसी प्लेटफार्म से एग्जिट भी करते हैं। आरपीएफ के प्लान से पुराने शहर के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते। उन्हें ८ नंबर पर एग्जिट करने के बाद फ्रीगंज ओवरब्रिज या हरिफाटक ओवरब्रिज का उपयोग करना पड़ता और यह अव्यवहारिक होता। इसी तरह फ्रीगंज तरफ वालों को प्लेटफार्म १ पर वाहन छोडऩा पड़ता।
आरपीएफ के इस प्लान का सबसे ज्यादा असर डेलीअपडाउनर्स पर पड़ता। उज्जैन से करीब ५ से ६ हजार लोग इंदौर, भोपाल, रतलाम, मक्सी के लिए आना-जाना करते हैं। यह अपडाउनर्स दोनों तरफ रहते हैं। पुराने शहर में रहने वाले अपडाउनर्स अपना वाहन प्लेटफार्म नंबर १ की तरफ पार्क करते हैं, जबकि नए शहर वाले ८ पर। ट्रेन पकडऩे के लिए नए शहर वाले को घूमकर १ नंबर पर जाना पड़ता और पुराने शहर वाले को वापसी में प्लेटफार्म नंबर ८ से निकलकर फिर से प्लेटफार्म नंबर १ की तरफ जाना पड़ता। ऐसे में यह अपडाउनर्स प्रभावित होते।
आरपीएफ के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता। उन्हें एंट्री-एग्जिट के लिए खूब चलना पड़ता।
४ एक प्लेटफार्म से दूसरे पर जाने के लिए रेलवे ने दो फुटओवर ब्रिज और लिफ्ट लगा रखा हैं। ऐसे में लिफ्ट पर दबाव भी काम बढ़ जाता और लोग परेशान होते।








