ज्ञान, तर्क और अध्यात्म का महासागर है भगवती सूत्र- श्री ऋषभरत्नविजयजी

चातुर्मास : श्री नागेश्वर पाश्र्वनाथ जैन मंदिर में धर्मसभा में बोले पंन्यास प्रवर महाराजश्री
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। भगवती सूत्र जैन आगमों का एक अत्यंत विशाल, अलौकिक और ज्ञानवर्धक ग्रंथ है, जिसमें लगभग 36,000 प्रश्नों का अद्भुत संग्रह है। इस ग्रंथ में गणधर श्री गौतम स्वामी द्वारा भगवान महावीर स्वामी से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे गए हैं और भगवान ने अत्यंत गूढ़, तर्कसंगत व कल्याणकारी उत्तर दिए हैं।
यह बात अरविंद नगर स्थित श्री नागेश्वर पाश्र्वनाथ जैन मंदिर में चातुर्मास के दौरान आयोजित धर्मसभा में मंगलवार को पंन्यास प्रवर श्री ऋषभरत्नविजयजी म.सा. ने कही। यहां पर आचार्यदेव श्रीमद् विजय वीररत्नसूरीश्वरजी महाराजा की दिव्य कृपा और आचार्यदेव श्रीमद् विजय पद्मभूषणरत्नसूरीश्वरजी महाराजा के सान्निध्य में चल रहे चातुर्मास के अंतर्गत भगवती सूत्र का वाचन एवं भावपूर्ण विवेचन हुआ। जिसमें श्री ऋषभरत्नविजयजी ने भगवती सूत्र की महत्ता और उसके आध्यात्मिक रहस्यों पर विस्तृत प्रकाश डाला।
गुरुदेव ने बताया कि यह महान ग्रंथ चार अनुयोगों के स्वरूप को समाहित करता है और इसकी विशालता के कारण इसे हाथी (हस्ती) की उपमा दी गई है। इसमें आचार-विचार, द्रव्यों का विस्तृत वर्णन, धर्मकथाएं, ज्योतिष, विविध विधियां और अनेक दार्शनिक विषयों का सुंदर निरूपण किया गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं को आगम वाणी के नियमित अध्ययन और मनन की प्रेरणा दी। आचार्य भगवंत के सान्निध्य में सिद्धि तप की सामूहिक क्रिया भी संपन्न हुई। मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं को नियम-प्रत्याख्यान प्रदान किए गए तथा विधिपूर्वक सभी से कलश भरवाकर सिद्धि तप का शुभारंभ कराया गया। इस आध्यात्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर तप, संयम और आराधना का संकल्प ग्रहण किया।
जैनाचार्य श्री जिनचंद्र सूरिजी के सानिध्य में आज से दस दिवसीय सत्य साधना मौन ध्यान शिविर
उज्जैन। भगवान महावीर द्वारा प्रतिपादित आत्मजागरण की प्राचीन साधना परंपरा पर आधारित दस दिवसीय सत्य साधना मौन ध्यान शिविर 5 अगस्त से अनंताय रिसोर्ट, में जैनाचार्य श्री जिनचंद्र सूरिजी महाराज साहब के सानिध्य में होगा।
शिविर में भाग लेने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से साधक-साधिका आए हैं। श्री अवंति पाश्र्वनाथ जैन श्वेतांबर मारवाड़ी समाज ट्रस्ट तथा आयोजन समिति के मीडिया प्रभारी सुनील डागा, जवाहर डोसी, शिरीष सकलेचा ने बताया कि शिविर में साधक-साधिकाएँ पूर्ण मौन का पालन करते हुए परिवार, व्यापार-व्यवसाय, मोबाइल, इंटरनेट तथा बाह्य संवाद से दूर रहेंगे। शिविर की व्यवस्थाएं भावी श्रीपूज्य यतिवर्य श्री अमृत सुंदरजी, यति श्री सुमतिसुंदर जी एवं आर्या श्री समकितप्रभा श्रीजी महाराज साहब के मार्गदर्शन में की गई हैं।









