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बहादुर बेटियां…स्कूल बचाने के लिए कलेक्टोरेट पर डट गईं, धूप में भूखे-प्यासे रहकर किया प्रदर्शन

जेन-जी और जेन-अल्फा ने डीईओ को झुकाया, फिलहाल सांदीपनि स्कूल जाने का आदेश रोका

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कांग्रेस के जिला और शहर अध्यक्ष भी पहुंचे नैतिक समर्थन देने

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। चारधाम क्षेत्र स्थित सराफा हायर सेकंडरी स्कूल की बहादुर बेटियां अपना स्कूल बचाने के लिए शुक्रवार को भूखी-प्यासी रहकर कलेक्टोरेट पर डट गईं। जेन-जी और जेन-अल्फा पीढ़ी कि इन बेटियों के दो घंटे तक चले प्रदर्शन का असर यह रहा है कि डीईओ महेंद्र खत्री को जिला मॉनिटरिंग समिति की बैठक होने तक स्कूल पूर्ववत रखने का लिखित आश्वासन देना पड़ा। प्रोटेस्ट को नैतिक समर्थन देने कांग्रेस के जिलाध्यक्ष-विधायक महेश परमार और शहर अध्यक्ष मुकेश भाटी भी पहुंचे। हालांकि यह धरने पर उनके साथ बैठे लेकिन ना तो भाषण दिया ना नारे लगाएं।

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दरअसल, दाउदखेड़ी स्थित सांदीपनि स्कूल को भव्य बनाने के लिए 11 स्कूलों को यहंा मर्ज किया जा रहा है। यह काम क्लोजर-मर्जर स्कीम के तहत किया जा रहा है। यह स्कूल महाराजवाड़ा क्रमांक-2, महाराजवाड़ा क्रमांक -3, नूतन हायर सेकंडरी, माधवगंज हायरसेकंडरी, सराफा गल्र्स हायर सेकंडरी, महाकाल मैदान, पालखेड़ी, सिंकदरी, गोठडा और सांवराखेड़ी के हैं। गुरुवार की शाम ही महाराजवाड़ा माधवगंज और सराफा हायर सेकंडरी स्कूल की शिफ्टिंग का आदेश जारी हुआ था। शुक्रवार को इस बात की जानकारी जब छात्राओं को लगी तो उन्होंने अभिभावकों को सूचना दी। इसके बाद आंदोलन को तेज करने का फैसला किया गया।

स्कूल बचाओ संघर्ष समिति के प्रमुख जितेंद्र सिंह सेंगर और अजीत सिंह पंवार के नेतृत्व में करीब 200 से ज्यादा छात्राओं ने कोठी रोड की ओर कूच कर दिया। एकाएक इनके पहुंचने से प्रशासनिक संकुल में हड़कंप मच गया और ताबड़तोड़ जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्र खत्री को बुलाया गया।

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संकुल के पोर्च में लगे नारे कलेक्टर को आना होगा
नौवीं से कक्षा 12 वीं की इन छात्राओं ने संकुल के पोर्च से लेकर मेनगेट को घेर लिया और नारेबाजी शुरू कर दी। इनके नारों से पूरा संकुल दो घंटे तक गूंजता रहा। इनकी एक ही मांग थी कि कलेक्टर मौके पर आए और स्कूल को मर्ज करने का फैसला वापस लेने का वादा करें। कलेक्टर रौशनकुमार सिंह संकुल में नहीं थे, ऐसे में संयुक्त कलेक्टर संदीप सिंह को मौके पर भेजा गया। उन्होंने छात्राओं से बातचीत की तो वह लिखित में आश्वासन देने पर अड़ गईं।

हाथ से लिखकर दिया डीईओ ने, नहीं मानीं जेन-जी

डीईओ महेंद्र खत्री ने एक सादे कागज पर आश्वासन लिख कर दिया। इसमें उन्होंने उल्लेख किया कि जिला मॉनिटरिंग कमेटी की मीटिंग होने तक स्कूल पूर्ववत संचालित होगा। कमेटी की मीटिंग में अभिभावक और उनके प्रतिनिधियों को भी बुलाया जाएगा। मीटिंग दो से तीन दिन के भीतर कर ली जाएगी। सादे कागज पर लिखे आश्वासन पत्र को छात्राओं ने यह कहकर मानने से इंकार कर दिया कि इस पर सील नहीं है। ऐसे में एक शख्स को डीईओ कार्यालय भेजकर सील लगवाई गई। इसकी एक कॉपी छात्राओं, दूसरी कॉपी संदीप सिंह को दी गई।

प्रदर्शन खत्म करने से पहले सबको भरोसे में लिया
जेन-जी और जेन-अल्फा पीढ़ी का नेतृत्व कर रही स्कूल की 12 वीं कक्षा की छात्रा मोनिका सिसोदिया ने प्रदर्शन खत्म करने से पहले सारी छात्राओं को भरोसे में लिया। कामर्स की स्टूडेंट मोनिका ने कहा कि डीईओ ने जो लिखकर दिया है, पहले वह आप सब सुन लें, अगर आप सभी इससे सहमत होंगी तो प्रदर्शन खत्म होगा, नहीं तो यह जारी रहेगा। मोनिका ने मोबाइल से देखकर पत्र पढ़ा और इसपर सभी ने सहमति दी, तब आंदोलन खत्म हुआ।

स्कूल आने-जाने और पढऩे में 12 घंटे लगेंगे
अभिभावकों ने बताया सुबह 9 बजे से स्कूल दाउदखेड़ी में शुरू होगा। बच्चों को 7 बजे हर हाल में उठना होगा। 8 बजे वे स्कूल रवाना होंगे। शाम 4 बजे स्कूल से छूटेंगे। 5 बजे तक लौटेंगे। गांव से आने वाली छात्राओं को आने-जाने में एक-एक घंटा अतिरिक्त लगेगा। इस तरह स्कूल आने-जाने और पढऩे में12 घंटे खर्च हो जाएंगे तो खेलेंगे कब और घर पर पढ़ाई कैसे करेंगे।

इसलिए विरोध कर रहे हैं अभिभावक
अभिभावकों ने बताया सराफा हायर सेकंडरी स्कूल सिर्फ छात्राओं के लिए है। जबकि सांदीपनि में को-एजुकेशन है। ऐसे में उन अभिभावकों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत हो जाएगी, जो सिर्फ गल्र्स स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं।

आरटीई नियमों का उल्लंघन

स्कूल बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष और अभिभाषक जितेंद्रङ्क्षसह सेंगर कहते हैं कि सरकार क्लोजर-मर्जर स्कीम के नाम पर सरकारी स्कूलों को बंद कर रही है। वह आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) का उल् लंघन कर रही है। सराफा स्कूल में धरमबड़ला, अंबोदिया, जलालखेड़ी सहित आसपास के 20 गांवों की छात्राएं पढऩे आती हैं। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत प्राथमिक स्कूल की दूरी 1 से 3 किलोमीटर, माध्यमिक की 5 किलोमीटर और दसवीं से ऊपर की कक्षाओं के लिए अधिकतम दूरी 8 किलोमीटर होनी चाहिए। दाउदखेड़ी स्कूल की दूरी 15 किलोमीटर से अधिक है। ऐसे में यह सीधे-सीधे शिक्षा के अधिकार के नियमों का उल्लंघन होगा।

मॉनिटरिंग समिति करेगी फैसला
फिलहाल छात्राओं को लिखित आश्वासन दिया है। उन्हें कहा है कि जिला मॉनीटरिंग समिति को ही मर्जर टालने के अधिकार है। इस बैठक में अभिभावक और उनके प्रतिनिधियों को बुलाएंगे। उनकी मौजूदगी में मर्जर पर सही फैसला लेंगे। फिलहाल स्कूल पूर्ववत अपनी पुरानी जगह पर लगेगा।
महेंद्र खत्री, डीईओ

बस्ता-बैग लेकर पहुंची थीं छात्राएं
छात्राएं बस्ता-बैग लेकर प्रदर्शन करने पहुंची थीं। उनके बैग प्रशासनिक संकुल की दीवार पर करीने से लगे थे। २ घंटे के प्रदर्शन में उनका जोश देखने लायक था। स्फूर्ति से भरी छात्राएं टस से मस होने को तैयार नहीं थीं।

शिफ्टिंग हुई तो परिजन हमारी पढ़ाई छुड़ा देंगे

हमारी कई साथी गांव से आती हैं। अगर स्कूल दाउदखेड़ी शिफ्ट करेंगे तो वे गांव कब लौटेंगी। बस सुविधा उपलब्ध कराने से कुछ नहीं होता। हम चाहते हैं कलेक्टर साहब आश्वासन दें।
-भाग्यश्री परमार, छात्रा

हमारी पढ़ाई बंद हो जाएगी। परिवार उतनी दूर जाकर पढऩे की परमिशन नहीं देंगे। सरकार बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ अभियान की बात करती है। इस तरह तो बेटियां आगे पढ़ ही नहीं पाएंगी।
-प्राची अगोत्या

हम काफी देर से जिम्मेदारों के आने का इंतजार कर रहे हैं। पर कोई नहीं आ रहा है। हमारा स्कूल किसी भ्ीा कीमत पर दाउदखेड़ी नहीं जाएगा। हम स्कूल के लिए लड़ेंगे। अभी हम प्रशासनिक संकुल के बाहर बैठे हैं, अगर बात नहीं सुनी गई तो हम अंदर घुस जाएंगे।
-नेहा दायमा

माता-पिता बढ़ी मुश्किल से पढ़ा रहे हैं। उनके लिए काम करना मजबूरी है। हम भी उनके काम में हाथ बंटाते हैं। अगर स्कूल दूर हो जाएगा तो मम्मी-पापा स्कूल छुड़ा देंगे। स्कूल हमारा यहीं रहना चाहिए।
-रूचिता

हमनें छात्राओं को नैतिक समर्थन दिया है
सरकार बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ की बात करती है पर उसकी नीयत ऐसी नहीं है। यह हम सबकी बेटियां हैं, इनकी पढ़ाई शहरी क्षेत्र में होनी चाहिए। सीएम और कलेक्टर को इस पर फैसला करना चाहिए। हमारा नैतिक समर्थन है।
महेश परमार, जिलाध्यक्ष कांग्रेस

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